नीली क्रांति- मछली पालन : प्रधानमंत्री ने किया मत्स्य संपदा योजना को लॉन्च, जानिए क्या फायदा होगा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज मत्स्य संपदा योजना (Pradhan Mantri Matasya Sampada Yojna – PMMSY) को लॉन्च किया। यह योजना देश भर के किसानों के लिए एक बड़ा तोहफा है। 20,050 करोड़ रुपये की इस प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना से करीब 55 लाख लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है। योजना के तहत पांच साल में 70 लाख टन मछली का अतिरिक्त उत्पाादन हो सकेगा। इससे मछली के एक्सपोर्ट को दोगुना होकर 1,00,000 करोड़ रुपये तक की हो जाएगी।

साथ हीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसानों द्वारा उपयोग के लिए एक व्यापक नस्ल सुधार बाज़ार और सूचना पोर्टल ई-गोपाला ऐप (E Gopala App) भी लॉन्च किया। यह मोबाइल ऐप किसानों को पशुधन से संबंधित मुद्दों पर समाधान देगी।

प्रधानमंत्री ने योजना को लॉन्च करते हुए बताया कि अभी इस योजना को देश के 21 राज्यों में शुरू की जा रही है और अगले 4-5 वर्षों में इस पर 20 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसमें से 1,700 करोड़ रुपये का काम आज से शुरू हो रहा है। आज शुरू हुई सभी योजनाओं के पीछे सोच यह है कि हमारे गाँव 21वीं सदी के भारत की ताकत बनें। इससे मछली उत्पादकों को नया इन्फ्रास्ट्रक्चर और आधुनिक उपकरण मिलेंगे, जिससे उनके लिए नए बाजार खुलेंगे।

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क्या है मत्स्य संपदा योजना
मत्स्य संपदा योजना देश में मत्स्य पालन क्षेत्र पर केंद्रित और इसके लगातार विकास के लिए एक बड़ी योजना है । योजना के तहत 20,050 करोड़ रुपये मत्स्य क्षेत्र को मिलने वाला अब तक का सबसे अधिक फंड है। इसमें से मरीन, इनलैंड फिशरीज और एक्वाकल्चर में लगभग 12340 करोड़ रुपये और फिशरीज इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए लगभग 7710 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। (विस्तृत जानकारी लेख के अंत वाले भाग में दिया गया है)

किसको क्या होगा लाभ
महत्वपुर्ण बात यह है कि मत्स्य संपदा योजना का लाभ मछुआरा समुदाय से संबंध रखने वाले लोगों को मिलेगा। जलीय क्षेत्रों से संबंध रखने वाले और जलीय कृषि का कार्य करने वाले या इसके लिए इच्छुक व्यक्ति ही इस योजना के पात्र होंगे। समुद्री तूफान, बाढ़, चक्रवात जैसी किसी प्राकृतिक आपदा का बुरी तरह से ग्रसित मछुआरों को इसका फायदा मिलेगा।

मछली पालने के लिए मिल सकेगा लोन
मछली पालने वाले किसानों को भी आसानी से तीन लाख रुपये का लोन मिल सकेगा। मछलीपालन को सरकार ने किसान क्रेडिट कार्ड से जोड़ दिया है। अब किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से किसान मछली पालन भी कर सकते है। कार्ड धारक चार फीसदी ब्याज दर पर तीन लाख रुपये तक का कर्ज ले सकते हैं। वहीं समय पर लोन का भुगतान करने पर ब्याज में अलग से छूट दी जाती है। एक लाख मछली पालक इसका लाभ ले सकेगें ऐसा अनुमान है।

और पढेंः नीली क्रांति क्या है

ई-गोपाला ऐप भी शुरु
पीएम मोदी के अनुसार ई-गोपाला ऐप एक डिजिटल माध्यम होगा जो पशुधन मालिकों की मदद करेगा। इससे एडवांस्ड पशुधन चुनना आसान होगा और उन्हें बिचौलियों से आजादी मिलेगी। यह ऐप पशुपालकों को उत्पादकता, स्वास्थ्य और आहार से संबंधित सभी जानकारी देगी।
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जानिए क्या है E-Gopala App
E-Gopala App (ई-गोपाला ऐप) के बारे मे ट्वीट कर प्रधानमंत्री ने कहा है कि यह हमारे मेहनती किसानों के लिए एक व्यापक नस्ल सुधार बाजार और सूचना पोर्टल प्रदान करता है। यह एक अभिनव प्रयास है, जिससे कृषि क्षेत्र को बहुत लाभ होगा।

ऐप के बारे में pmmodi.in पर विस्तार से जानकारी दी गई है। ऐप किसानों के प्रत्यक्ष उपयोग के लिए एक व्यापक नस्ल सुधार बाज़ार और सूचना पोर्टल है। वर्तमान में देश में पशुधन का प्रबंधन करने वाले किसानों के लिए कोई डिजिटल प्लेटफॉर्म उपलब्ध नहीं है, जिसमें सभी रूपों में रोग मुक्त जर्मप्लाज्म की खरीद और बिक्री शामिल है। E-Gopala App के जरिए पशु की प्राथमिक चिकित्सा, टीकाकरण, उपचार आदि के लिए किसानों का मार्गदर्शन मिलेगा। साथ-साथ टीकाकरण, गर्भावस्था निदान, शांत करने आदि के लिए नियत तारीख और किसानों को क्षेत्र में विभिन्न सरकारी योजनाओं, अभियानों के बारे में भी यह ऐप सूचित करेगा। ई-गोपाला ऐप इन सभी पहलुओं पर किसानों को समाधान प्रदान करेगा और मददगार साबित होगा

मत्स्य संपदा योजना और इसके लाभ के बारे में जानिए विस्तार से…

नीली क्रांति के माध्यम से मत्स्य पालन क्षेत्र के सतत और जवाबदेह विकास के लिए प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना को कैबिनेट की मंजूरी पहले हीं मई माह में दे दी गई थी, (स्रोत- PIB Delhi, 20.05.2020)

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के क्रियान्वयन को मंजूरी दे दी है। योजना का उद्देश्य नीली क्रांति के माध्यम से देश में मत्स्य पालन क्षेत्र के सतत और जवाबदेह विकास को सुनिश्चित करना है। कुल 20050 करोड रुपए की अनुमानित लागत वाली यहयोजना, केन्द्रीय येाजना और केन्द्र प्रायोजित योजना के रूप में लागू की जाएगी। इसमें केन्द्र की हिस्सेदारी 9407 करोड रूपए, राज्यों की हिस्सेदारी 4880 करोड रुपए तथा लाभार्थियों की हिस्सेदारी 5763 करोड रुपए होगी।

इस योजना को वित्त वर्ष 2020 21 से 2024 25 तक पांच वर्षों की अवधि में लागू किया जाएगा।
योजना के दो घटक होंगे। पहला केन्द्रीय योजना और दूसरा केन्द्र प्रायोजित योजना।

केन्द्रीय योजना के दो वर्ग होंगे एक लाभार्थी वर्ग और दूसरा गैर लाभार्थी वर्ग। केन्द्र प्रायोजित योजना को तीन प्रमुख श्रेणियों में विभाजित किया गया है

  • उत्पादन और उत्पादकता को प्रोत्साहन
  • अवसंरचना और उत्पादन बाद प्रंबधन
  • मत्स्य पालन प्रबंधन और नियामक फ्रेमवर्क

योजना का वित्त पोषण
केन्द्रीय परियोजना के लिए 100 प्रतिशत वित्तीय जरुरतों की पूर्ति केन्द्र की ओर की जाएगी। इसमें लाभार्थी वर्ग से जुडी गतिविधियों को चलाने का काम पूरी तरह से राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड सहित केन्द्र सरकार का होगा। इसमें सामान्य लाभार्थियों वाली परियोजना का 40 प्रतिशत जबकि अनुसूचित जाति और जनजाति तथा महिलाओं से जुडी परियोजना का 60 प्रतिषण वित्त पोषण केन्द्र सरकार करेगी।

केन्द्र प्रायोजित योजना का वित्त पोषण
इस योजना के तहत गैर लाभार्थियों से जुडी गतिविधियों का पूरा खर्च राज्य और केन्द्र शासित प्रदेश की सरकारें मिलकर उठाएंगी।

  • इसके तहत पूर्वोत्तर तथा हिमालयी क्षेत्र वाले राज्यों में लागू की जाने वाली ऐसी परियेाजना का 90 फीसदी खर्च केन्द्र और 10 फीसदी खर्च राज्य सरकारें वहन करेंगी।
  • अन्य राज्यों के मामले में केन्द्र और संबधित राज्यों की हिस्सेदारी क्रमश 60 और 40 प्रतिशत होगी।
  • केन्द्र शासित प्रदेशों में लागू की जाने वाली ऐसी योजनाओं का सौ फीसदी वित्त पोषण केन्द्र की ओर से किया जाएगा।

गैर लाभार्थी वर्ग की योजना का वित्त पोषण
इस वर्ग की योजना का वित्त पोषण पूरी तरह से संबधित राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों की ओर से किया जाएगा। इसमें सामान्य श्रेणी वाली परियोजना में सरकार, राज्य और केन्द्रशासित प्रदेशों की कुल हिस्सेदारी 40 प्रतिशत से अधिक नहीं होगी जबकि महिलाओं,अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग से जुडी परियोजना के लिए सरकार की ओर से 60 फीसदी की आर्थिक मदद दी जाएगी।

  • पूर्वोत्तर तथा हिमालयी क्षेत्र के राज्यों में ऐसी परियोजनाओं के लिए सरकार की ओर से 90 प्रतिशत वित्त पोषण किया जाएगा जबकि राज्यों की हिस्सेदारी 10 प्रतिशत होगी।
  • अन्य राज्यों के लिए यह क्रमश 60 और 40 प्रतिशत होगी।
  • केन्द्र शासित प्रदेशों के लिए केन्द्र की ओर से 100 फीसदी मदद दी जाएगी।

पढेंः नीली क्रांति क्या है

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