विश्व प्रसिद्ध पर्यावरणविद्, चिपको आंदोलन के जनक सुंदर लाल बहुगुणा का निधन

विश्व प्रसिद्ध पर्यावरणविद्, चिपको आंदोलन के जनक सुंदर लाल बहुगुणा का निधन

विश्व प्रसिद्ध पर्यावरणविद्, चिपको आंदोलन के जनक सुंदर लाल बहुगुणा का निधन हो गया. वो कोरोना वायरस से संक्रमित हो गए थे और ऋषिकेश एम्स में उन्होनें आखिरी सांस ली, उनकी आयू 95 वर्ष थी।

बहुगुणा के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुख जताया है. उन्होंने ट्वीट किया, ‘श्री सुंदरलाल बहुगुणा जी का निधन हमारे देश के लिए एक बड़ी क्षति है. उन्होंने प्रकृति के साथ सद्भाव में रहने के हमारे सदियों पुराने लोकाचार को प्रकट किया. उनकी सादगी और करुणा की भावना को कभी भुलाया नहीं जा सकेगा. मेरे विचार उनके परिवार और कई प्रशंसकों के साथ हैं. शांति.’

वहीं उत्तराखंड के सीएम तीरथ सिंह रावत ने ट्वीट किया, ‘चिपको आंदोलन के प्रणेता, विश्व में वृक्षमित्र के नाम से प्रसिद्ध महान पर्यावरणविद् पद्म विभूषण श्री सुंदरलाल बहुगुणा जी के निधन का अत्यंत पीड़ादायक समाचार मिला. यह खबर सुनकर मन बेहद व्यथित हैं. यह सिर्फ उत्तराखंड के लिए नहीं बल्कि संपूर्ण देश के लिए अपूरणीय क्षति है.’

 

मुख्यमंत्री ने लिखा, ‘पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में दिए गए महत्वपूर्ण योगदान के लिए उन्हें 1986 में जमनालाल बजाज पुरस्कार और 2009 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया. पर्यावरण संरक्षण के मैदान में श्री सुंदरलाल बहुगुणा जी के कार्यों को इतिहास में सुनहरे अक्षरों में लिखा जाएगा.’ तीरथ सिंह रावत ने लिखा, ‘मैं ईश्वर से दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करने और शोकाकुल परिजनों को धैर्य व दुख सहने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना करता हूं.’

पर्यावरणविद् बहुगुणा पिछले कई सालों से हिमालय में वनों के संरक्षण के लिए लड़ रहे थे. वह पहले 1970 के दशक में चिपको आंदोलन के प्रमुख सदस्य में से एक थे और बाद में 1980 के दशक से शुरू होकर 2004 के शुरू में एंटी टिहरी डैम आंदोलन की अगुवाई भी की थी.

वहीं वरिष्ठ  पत्रकार वेद विलास उनियाल बताते हैं कि सुंदरलाल जितने जुझारू और क्रांतिकारी व्यक्ति रहे हैं उतने ही सरल, सौम्य और चिंतन-मनन करने वाले रहे हैं. जब भी वे मिले हमेशा कहते थे कि ये प्रकृति मनुष्य‍ के लिए है लेकिन मनुष्यर इसे इस्तेलमाल करना नहीं जानता. इसे नुकसाना पहुंचाकर मनुष्यु अपने जीवन को ही नुकसान पहुंचा रहा है. उनकी चिंता प्रकृति के साथ-साथ मनुष्यन के भावी जीवन को लेकर भी थी जो इसी प्रकृति पर टिका है.

सुंदर लाल बहुगुणा का जन्म 9 जनवरी 1927 को उत्तराखंड के टिहरी में हुआ था. वह विलक्षण प्रतिभा के व्य क्ति थे. युवावस्था से ही सामाजिक क्षेत्र और जन सरोकारों के प्रति रुझान रहा. 18 साल की उम्र में उन्हें पढने के लिए लाहौर भेजा गया. वहां डीएवी कालेज में उन्होंने पढ़ाई की. महान क्रांतिकारी शहीद श्रीदेव सुमन उनके मित्रों थे जिनके कहने पर उन्होंने सामाजिक क्षेत्र से जुड़ने का निश्चय किया था.

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