स्टार्टअप क्या है ? स्टार्टअप बिज़नेस ऋण सुविधाएं क्या हैं ? । WHAT IS STARTUP and STARTUP BUSINESS LOAN

स्टार्टअप एक युवा कंपनी है जिसे एक या एक से अधिक उद्यमियों द्वारा की जाती है, जिसके तहत एक यूनिक उत्पाद या सर्विस शुरु कर उसे बाजार में लाया जाता है. इसकी शुरुआत कोई एक व्यक्ति कर सकता या फिर अपने कई पाटर्नर के साथ स्टार्ट-अप को शुरू कर सकते हैं। नए आइडिया के साथ शुरू हुए स्टार्ट-अप बाजार में आसानी जल्दी जगह बना लेते हैं। कंपनी को चलाने के लिए संस्थापक अपनी पूंजी लगा सकता है या फिर बड़ी कंपनियां पूंजी लगा सकती है। हांलाकि स्टार्टअप के लिए लोन सुविधा भी उपलब्ध है। स्टार्टअप्स (Types of Startups) मुख्यतः छः प्रकार का होता है

1) लघु/छोटा व्यवसाय स्टार्टअप Small Business Startup । : इसके तहत कम पुंजी वाले काम धंधे को शुरु किया जाता है, जिससे परिवार का भरण पोषण सो सके और कुछ मुनाफा हो। इसमें ज्यादातर विक्रेताओं की छोटी दुकानें होती हैं जो दैनिक जीवन से जुड़े कामों जैसे बुटीक, स्टेशनरी, रेस्टोरेंट, बेकर, कारपेंटर और मोबाईल शॉप आदि करते हैं।

  1. बड़े पैमाने पर स्टार्टअप Big Scale Startup । : इसके तहत नई परियोजनाओं को शुरु किया जाता है, जिसका दायरा बड़ा हो, वह कंपनी जिसका Finite Life अवधी हो। आर्थात जिसका एक सीमांकन हुआ हो या जिसकी सीमा निर्धारित हो या अंकित हो। छोटे गैरेज से शुरु होकर आज तक गगनचुंबी इमारतों तक पहुंचने वाले स्टार्टअप इस श्रेणी के अंतर्गत आते हैं। अमेज़ॅन, फेसबुक, ईबे औऱ अलिबाबा आदि जैसे बड़े नाम शामिल हैं। उनके पास दुनिया में सबसे सफल राजस्व और व्यवसाय मॉडल हैं।
  2. स्केलेबल स्टार्टअप Scalabe Startup । : जो बड़ी कंपनी के रुप में तैयार होने के लिए शुरु होता है। इसे शुरु करने वाले की मनसा होती है कि वो दुनिया में बदलाव ला सकते है अपने प्रोडक्ट या सर्विसेज के द्वारा। यह एक लचीला स्टार्टअप मॉडल है। इस स्टार्ट-अप के कामकाज के पीछे परिवार को बनाए रखने के लिए छोटे पैमाने पर चलया जा सकता है यह बड़े पैमाने पर स्टार्ट-अप करने के लिए भी कार्य कर सकता है। यदि अधिक धन लगाकर इसके विस्तार की संभावना होती है तो इसे स्केलेबल स्टार्टअप कहा जाता है।
  3. खरीदने योग्य स्टार्टअप Buyable Startups । : ऐसे स्टार्टअप्स जिन्हें बेचने के उद्देश्य से बनाया जाता है . इनका लक्ष्य करोड़ों रुपये की कंपनी बनाना नहीं होता बल्कि कुछ समय बाद किसी बड़ी कंपनी को बेच देना होता है, मतलब इसे खरीदने योग्य बना कर बेचना हीं लक्ष्य होता है, जैसे मोबाईल एप सोल्यूशन आदि कमाना नहीं के लिए बनाया जाता है. ये ऐसे प्रकार हैं जो से अधिक समय तक बनाए रखने के लिए नहीं किए गए थे और जब कोई खरीदार इस व्यवसाय के लिए अच्छी कीमत देता है तो बेच दी जाती है।
  4. लाइफस्टाइल स्टार्टअप Lifestyle Startups । : यह एक ऐसा स्टार्टअप जो स्वनियोजित लोगों द्वारा शुरू किया जाता है, जो अपने मालिक होने के लिए अपनी नौकरी छोड़ देते हैं लेकिन फिर भी बंधे रहने की इच्छा नहीं रखते हैं। वे फ्रीलांस यानी की स्वतंत्र रूप में काम करते हैं। वेब डिजायनर, कंसल्टेंट आदि

6. सोशल स्टार्टअप । Soicial Startup । : इसको एक परिवर्तन हेतु शुरु किया जाता है, उद्देश्य धन कमाना नहीं बल्कि प्रभाव लाना होता है। स्केलेबल स्टार्टअप से अलग इसके पीछे यो सोच होता है कि दुनियां में एक बदलावा लानी है। विकास और कल्याण के उद्देश्य होता है। इसके लिए धन को क्राउडफंडिंग से इकट्ठा किया जाता है । एनजीओ ओर समाज कल्याण की भावना रखने वाले लोग इस स्टार्टअप को कर सकते हैं।

किसी भी स्टार्टअप शुरु में इसे प्रोपराइटरशिप, पाटर्नरशिप या प्राइवेट लिमिटेड के रुप में पंजिकृत करवा सकते हैं। जब वह सफलता पुर्वक चलने लगे तो उसे मिनिस्ट्री आफ कापरेट अफेयर्स से रजिस्टर्ड करना चाहिए। स्टार्टअप के आइडिया को साकार करने के लिए फंड की जरूरत पड़ती है। अपनी जमा पूंजी भी लगा सकते हैं या फिर किसी मित्र से रुपये लेकर उसमें इन्वेस्ट किया जा सकता है। यदि यह संभव नहीं हो तो वेंचर कैपिटलिस्ट से सहयोग ले सकते है। उन्हें यदि आपका आइडिया पसंद आया तो आपके प्रोजेक्ट में फंड इन्वेस्ट कर सकते हैं। इन सबके अलवा सरकार द्वारा कई संस्थाओं के माध्यम से स्टार्ट-अप बिजनेस लोन देने का प्रावधान है।

स्टार्ट-अप बिज़नेस लोन ।Startup Business Loan । :
पिछले कुछ वर्षों में लगभग सभी क्षेत्रों में स्टार्ट-अप शुरू हुए हैं। भारत में ऐसे स्टार्ट-अप शुरु हुए हैं जो विकसित होने की क्षमता रखते हैं और भविष्य में एक मार्केट लीडर के रूप में सामने आ सकते हैं। हालांकि ज्यादातर नए व्यवसाय ऋण सुविधाओं की कमी के कारण बंद हो जाते हैं। नए स्टार्टअप को अपना व्यवसाय चलाने के लिए मजबूत क्रेडिट सिस्टम की आवश्यकता होती है। पर्याप्त पैसा होने पर स्टार्टअप नवाचार और दीर्घकालिक दृष्टिकोण पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं। ऐसे में स्टार्टअप बिजनेस लोन का लाभ वे व्यक्ति ले सकते हैं, जो अपना खुद का बिजनेस वेंचर शुरू करने वाले हैं या वर्तमान में बिजनेस कर रहे हैं। स्टार्टअप लोन आपके व्यवसाय में नकदी का नियमित प्रवाह बनाए रखने तथा व्यवसाय का विस्तार, विकास और नवाचार करने में सहायता करता है। सरकार द्वारा कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं, जो स्टार्टअप और एमएसएमई के लिए ऋण की सुविधा देती हैं।

मुद्रा ऋण । Mudra Loan । : लघु और मध्यम उद्योगों के लिए ऋण प्राप्त करना मुश्किल होता है। उन्हे निजी ऋणदाताओं से बहुत अधिक ब्याज दर पर पैसा उधार लेना पड़ता है। इसी परिस्थिति को देखते हुए सरकार ने एमएसएमई को आसानी से ऋण प्रादान करने तथा इसके माध्यम से व्यवसाय के विकास करने के लिए मुद्रा ऋण योजना की शुरूआत की है। इसके तहत लघु और मध्यम आकार के उद्यमों को ऋण की सुविधा दी जा रही है। जिसका मुख्य उद्देश्य व्यवसाय की संभावना को प्रोत्साहित करना है। इस योजना के तहत मिलने वाले ऋण को तीन श्रेणियों में विभाजित किया जाता है, जो हैं –
शिशु – इस श्रेणी के तहत अधिकतम 50,000 रुपये का ऋण लिया जा सकता है।
किशोर – इस श्रेणी के तहत ऋण की सीमा 5 लाख रुपये है।
तरुण – इस श्रेणी के तहत अधिकतम 10 लाख रुपये तक का ऋण मिल सकता है।

स्टैंड-अप इंडिया । Standup India । : स्टार्टअप्स की राह में आने वाली कठिनाईयों को तथा व्यवसाय सस्ती दरों पर ऋण का न मिलने के कारण व्यवसाय को अच्छे से नही चला पाने वाले इसका साभ ले सकते हैं। सरकार ने स्टार्टअप को ऋण उपलब्ध कराने के लिए 2016 में स्टैंड-अप इंडिया योजना शुरू की थी। योजना का उद्देश्य महिला उद्यमिता को बढ़ावा देना और विनिर्माण, व्यापार और सेवा क्षेत्र में कार्यरत व्यवसायों के लिए ऋण सुविधा प्रदान करना है। चूंकि स्टार्ट-अप जमीनी स्तर पर नौकरियां पैदा कर सकते हैं, इसलिए क्रेडिट संस्थानों द्वारा पात्र उम्मीदवारों को 10 लाख से लेकर एक करोड़ रुपये तक ऋण प्रदान करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। यह योजना अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिला उद्यमियों को सशक्त बनाने में योगदान भी करती है। इसका लाभ लेकर वो अपने परिवार के सदस्यों की मदद कर आर्थिक विकास में भागीदार बन सकते हैं।

राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम द्वारा दी जाने वाली सब्सिडीः राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम द्वारा एमएसएमई के विकास को बढ़ावा देने के लिए इस योजना को शुरू किया गया है। इस योजना के तहत उधार लेने वाली इकाई को दो तरह के लाभ प्रदान किया जाता है। इसमें कच्चे माल की सहायता और विपणन सहायता शामिल होती है। एनएसआईसी ने सूक्ष्म और मध्यम इकाइयों को इस तरह के ऋण प्रदान करने के लिए विभिन्न वित्तीय संगठनों के साथ भागीदारी की है। यह योजना विपणन सहायता कार्यक्रम के माध्यम से उत्पादों और सेवाओं के बाजार मूल्य को बढ़ाने की सुविधा देती है। वहीं दूसरी ओर कच्चे माल की सहायता योजना के माध्यम से स्वदेशी और आयातित कच्चे माल की खरीद के लिए फंड देती है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य सूक्ष्म और लघु उद्योगों को वित्तीय सहायता देकर इन इकाइयों में गुणात्मक और मात्रात्मक परिवर्तन लाने में सहायता करना है, जिससे यह विकसित हो सकें।

क्रेडिट गारंटी फंड योजना ।Credit guarenty fund yojna । : यह सरकार द्वारा वित्त पोषित एक योजना है, जिसका लाभ देश की सूक्ष्म और लघु इकाइयों द्वारा उठाया जा रहा है। ऋण वितरण प्रणाली को मजबूत करने के लिए सेवा और विनिर्माण गतिविधियों में शामिल व्यवसायों को आसानी से ऋण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से यह क्रेडिट गारंटी फंड योजना शुरू की गई थी। पात्रता की मानदंडों को पूरा करने वालों को योजना के तहत संपार्श्विक मुक्त ऋण प्राप्त दिया जाता है । इसके तहत वर्तमान या नए व्यवसाय के वित्तपोषण के लिए अधिकतम 10 लाख रुपये तक का ऋण लिया जा सकता हैं। खुदरा व्यापार, शैक्षणिक संस्थानों, कृषि, और स्वयं सहायता समूहों को छोड़कर विनिर्माण या सेवा गतिविधियों में लगे हुए एमएसएमई इस योजना का लाभ ले सकते हैं। प्रशिक्षण संस्थान इस योजना के तहत ऋण प्राप्त करने के लिए पात्र होते हैं।

आप में अगर इच्छा शक्ति और जोखिम लेने की साहस हो तो तमाम तरह की इन श्रृण सुविधाओं और सहायता योजनाओं का लाभ लेकर स्टार्टअप की शुरुआत की जा सकती है। वो कहते हैं ना कि…

ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले
ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है (अल्लामा इक़बाल)

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