1 अप्रैल से सीएसआर अनिवार्य, अपने कर्मचारियों के लिए किया गया काम सीएसआर नहीं

चंडिगढ़ :कंपनियों द्वारा केवल अपने कर्मचारियों के लिए कल्याण की पहल और नियमों का मात्र अनुपालन किया जाना कॉरपोरेट सामाजिक जिम्मेदारी (सीएसआर) के दायरे में नहीं आता है, कारपोरेट जगत से ताल्लूक रखने वाले एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने बुधवार को चंडिगढ़ में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कहा.

 इसी कार्यक्रम में भास्कर चटर्जी, महानिदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी, भारतीय कारपोरेट अफेयर्स संस्थान, ने कहा की नये कंपनी अधिनियम के तहत अब 5 करोड़ रुपये और इससे अधिक की लाभ वाली कंपनियों के लिए सीएसआर अब अनिवार्य हो जाएगा. चटर्जी ने कहा, ‘ सीएसआर जो की कंपनी अधिनियम के तहत अनिवार्य कर दिया है और संसद द्वारा पारित किया गया था, 1 अप्रैल, 2014 से प्रभावी हो जाएगा ‘.

कंपनियों अपने तीन साल के औसत लाभ का कम से कम दो प्रतिशत हर वर्ष सीएसआर गतिविधि पर खर्च करना होगा. जिन कंपनियों पर ये लागू होंगी उसके मुख्य पैमाने होगा कुछ इस तरह है-

  • 1,000 करोड़ रुपये और उससे अधिक के कारोबार के वाली सभी कंपनी
  • रुपये का शुद्ध मूल्य 500 करोड़ और अधिक का कारोबार के वाली सभी कंपनी
  • 5 करोड़ रुपये और  इससे अधिक की शुद्ध लाभ वाली सभी कंपनी

श्री चटर्जी ने कहा कहा कि, “1 अप्रैल से देश की सभी 16,245 पंजीकृत कंपनियों को अपने बोर्ड के तीन सदस्यों को उनके सीएसआर समिति के मनोनीत करना होगा. नए कानून के अनुसार कंपनियों कोई भी काम अपने हिसाब से करके सीएसआर गतिविधि के रूप में यह दावा नहीं कर सकते,” . उन्होनें जोर देकर यह कहा कि  नए नियमों के तहत, महज अपने ही कुछ कर्मचारियों के लिए किया वेल्फेयर का काम है सीएसआर नहीं है कि यह एक मानव संसाधन गतिविधि है. किसी और नियम या विनियमन के तहत होने वाला कार्य सीएसआर अनुपालन नहीं है. कंपनियों को इस भूमिका को लेना चाहिये और स्वेच्छा से नियम के होकर भी काम करना चाहिए. 

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