लोकतंत्र अभिशाप क्यों बनता जा रहा है?

लोकतंत्र जिसे जनता के लिए वरदान कहा गया, वही लोकतंत्र अभिशाप क्यों बनता जा रहा है? पहले राजा लड़ते रहते थे अब वही काम पार्टियां कर रही हैं अपना शासन करने के लिए दूसरे की सरकार गिरा कर अपनी सरकार बनाना यह खेल वर्षों से खेला जा रहा है और देश का सारा समय इन्हीं नव राजाओं के राज करने पर लग रहा है ।

जनता बेवकूफ बन रही है वह चुनती किसी को है और राज वो कर रहा होता है जिसे जनता ने नकार दिया होता है जनता अवाक रह जाती है इसे लोकतंत्र का नाम दिया जाता है यह सरासर जनता के साथ अन्याय है । लोकतंत्र में यह घटिया खेल बन्द होना चाहिए. इसीलिए यह देश तरक्की नहीं कर रहा है देश में कोई कानून ऐसा बनाना चाहिए कि जनता जिसे चुने वह शासन करे और जो हारे वह 5 वर्ष शासन की कमियों पर ध्यान दे ना की सरकार गिरा कर अपनी सरकार बनाने में ध्यान दे और जो सरकार चुनी गई है वह जनता के काम पर ध्यान दे । इस विपरीत परिस्थिति में भी देश के राजनीतिक दल जनता की सुविधा की बात नहीं कर सरकार गिराने बचाने में लगी हुई हैं और केवल दो राज्य या दो पार्टियां नहीं पूरा देश करोना के साथ साथ किसकी सरकार बनेगी के लिए फिक्र कर रहा है इसी से देश का विकास होगा ।

किसी भी राजनीतिक पार्टी को मजबूत देश की नहीं मजबूत वोट की फ़िक्र है और आज का युवा वर्ग बेरोजगारी से तंग है देश में उद्योग धंधे नहीं है उनकी चिंता नहीं है बस हमारी सता आ जाए पूरे देश की अर्थव्यवस्था भले खराब हो जाए ।

युवा पीढ़ी को सोचना होगा तभी परिवर्तन आएगा आप किसी भी विचारधारा के हों काम सबको चाहिए घर परिवार चलाने के लिए ।

(नरेंन्द्र कुमार सिंह के फेसबुक वाल से सभार)

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