समय तू धीरे-धीरे चल

स्कूल का अंतिम दिन। फेयरवेल के धूम-धड़ाक बीच अपने सेल फोन नंबरों की अदला-बदली और संपर्क में रहने के वादे के साथ सभी लड़के-लड़कियां अपने घर चले जाते हंै। सपनों के रंग बदलने लगे थे। लोगों से सुन रखा था कि काॅलेज में खूब मस्ती होती है। एक फिल्मी तस्वीर थी सबके मन में-गुलाबी सपनों की तरह। राहुल भी आज काफी रिलैक्स महसूस कर रहा था। बचपन से लेकर अबतक जिस बात के लिए वह तरसता रहा वह आज पूरी हो गई। दरअसल वह अपने शर्मीले स्वाभाव के कारण स्कूल के कई इवेंट में भाग ले नहीं पाता था। हालांकि जब भी उसने थोड़ी हिम्मत जुटाई तो वह अव्वल आया। साइंस ओलंपियाड में टाॅप कर उसने प्रूव कर दिया कि उसमें भी काफी दमखम है। उसके बाद टीचर तो क्या स्कूल के वो बच्चे भी उससे बतियाने लगे जो उसकी तरफ देखते भी नहीं थे।

आज दूसरी दफा राहुल को भरे स्कूल में अटेंशन मिला था। किसी साइंस के सब्जेक्ट के लिए नहीं बल्कि गाने के लिए। सभी दोस्तों की फरमाइश पर उसने स्टेज पर इंग्लिश गाना गाया जिसकी जमकर तारीफ हुई। तालियों की गड़गड़ाहट के बीच वह सिर्फ मानसी का रिएक्शन देखना चाह रहा था। मानसी हाल ही में उसकी दोस्त बनी थी और उसका पूरा ख्याल रखती थी।

‘‘यार! तुम तो राॅक स्टार हो। छा गए आज। म्यूजिक को ही कैरियर बनाओ।’’ मानसी ने राहुल का हाथ अपने हाथ में लेकर कहा।

‘‘अभी सोचा नहीं है। तुम क्या करने वाली हो।’’ अपने से ज्यादा वह मानसी में इंटररेस्टेड था।
‘‘डैड का कंस्ट्रक्शन का काम है। वह चाहते हैं कि आर्किटेक्ट बनकर उनका हाथ बटाउं। चलो जो भी हो देखते हैं।’’ अभी इनकी बात चल ही रही थी कि वहां कुछ और दोस्त आकर फिल्म देखने का प्रपोजल बनाते हैं। राहुल एक मध्यम परिवार का लड़का था। उस

सोच इन बड़े घर के बच्चों से अलग थी। वह अपनी मम्मी से इजाजत लेकर दोस्तों के साथ फिल्म देखने जाता है। पहली बार वह उन्मुक्त होकर मानसी के साथ समय बिता रहा था जबकि जुगल को यह देख जलन हो रही थी। राहुल को पता था कि मानसी उसे पास फटकने नहीं देती।
‘‘इस लोफर को पता नहीं क्यों मेघना ले आई। अपने पापा की नेतागिरी का रौब सबपर झाड़ता रहता है।’’
‘‘हां! तुमसे दोस्ती करने के लिए अप्रोच कर रहा था। मैंने मना किया तबसे मुझसे कटा रहने लगा है।’’
‘‘मेरा नंबर मत देना उस आवारा को।’’ मानसी ने राहुल पर अपना विश्वास जताया।

यह मौज-मस्ती भरा दिन खत्म हो जाता है। मानसी ने राहुल से कहा कि उसके परिवार वाले थोड़े पुराने विचारों वाले हैं इसलिए वह घर पर फोन न करे। वह खुद कर लेगी पर ऐसा हुआ नहीं। कई दिनों के इंतजार के बाद राहुल ने मानसी को काॅल किया जिसका उसे जवाब नहीं मिला। निराश था वह। इसी बीच घरवालों के कहने पर इंजीनियरिंग काॅलेज में बेमन से एडमिशन ले लेता है। राहुल को चंद दिनों में ही महसूस होने लगता है कि उससे यह पढ़ाई नहीं हो सकती। उखड़ा-उखड़ा रहने लगा। अपने आपको उसने घर में कैद कर लिया। पढ़ाई छूट चुकी थी। उसे गिल्ट था कि मां-बाप के पैसे बर्बाद हो गए जबकि घरवालों की सोच थी कि जो हुआ सो हुआ अब अपने मन का कुछ कर ले। इस बीच मानसी बर्थडे विश करने उसके घर आती है। मायूस राहुल के चेहरे पर खुशी छा जाती है। घरवालों को लगता है कि शायद राहुल की बीमार जिंदगी का यह इलाज साबित हो सकती है। मगर वह अंतिम दिन था। मानसी लौटकर नहीं आई। उसने पलटकर फोन भी नहीं किया। एक काॅमन फ्रेंड ने बताया कि वह अपने काॅलेज के नए दोस्तों में मस्त हो गई है। भोले राहुल के लिए जैसे वक्त वहीं ठहर जाता है। वह सदमे से उबर नहीं पा रहा था कि जिस लड़की के लिए उसने अपने सारे दोस्तों को खो दिए वह ऐसे बदल जाएगी।

एक दिन मेघना मिलती है। ‘‘राहुल! तूने पढ़ाई क्यों छोड़ी?’’
‘‘मानसी कभी मिली क्या?’’ छूटते ही पूछता है।

‘‘पागल है तू! खुदगर्ज थी वो। बातों-बातों में उसने एक बार बताया था कि राहुल से हेल्प लेने के अलावा कोई संबंध नहीं है। बेटे! दुनिया आगे बढ़ गई और तेरी घड़ी की सूई वहीं अटकी हुई है।’’ मेघना दुःखी थी राहुल को देखकर। राहुल के माता-पिता उसके हर उस दोस्त को अप्रोच कर रहे थे जो उनके बेटे को इस अंधकार से बाहर निकाल दे मगर सभी ने अफसोस जताने के अलावा कुछ नहीं किया। राहुल उचाट दिल से गिटार सीखने गया मगर टिक नहीं पाया। अपने पसंद की लैंग्वेज सीखने में भी उसे ज्यादा मजा नहीं आया।

डाॅक्टरों ने बताया कि यह एक प्रकार का मेंटल डिप्रेशन है जिसका इलाज दवाओं से ज्यादा व्यक्ति का साथ देने से होता है। उनकी सलाह पर राहुल घर से निकलने लगा। एक दिन नजदीक के माॅल में वह बेवजह घूम रहा था कि उसकी नजर अपनी एक पुरानी दोस्त पर पड़ती है।
‘‘खुशी! त्ुाम यहां कैसे?’’
‘‘अरे राहुल! कहां हो आजकल।’’ खुशी ने हाथ मिलाते हुए पूछा।
‘‘अपनी बताओ। डाॅक्टर खुशी!’’
‘‘यही तो रोना है कि मैं डाॅक्टर नहीं बन पायी। बनना भी नहीं चाहती थी। मेरे माता-पिता डाॅक्टर हैं इसलिए डाॅक्टरी थोपी जा रही थी। इस प्रेशर ने मुझे बीमार बना दिया।’’ दोनो सीढ़ियों पर बैठ गए। पहली बार राहुल को लगा कि इस दुनिया में उसके अलावा भी कई लोग परेशान हैं।
‘‘आईसक्रीम लाता हूं।’’ वह खुशी को कूल डाउन करना चाह रहा था।
‘‘सुना तुम्हें मानसी ने धोखा दिया। यार! लोगों को समझना मुश्किल है। मेरा ब्वाय फ्रेंड मनीष मेडिकल में एडमिशन होते ही कन्नी काट गया। सच बताउं! मुझे अच्छा लगा। ऐसे लोगों को जितनी जल्दी जान जाओ उतना ही अच्छा।’’ राहुल खामोश था।

‘‘जानते हो मैं टीचर बनना चाहती हूं। कालोनी के गरीब बच्चों को मैं आज भी मौका निकालकर पढ़ाती हूं। बहुत मजा आता है। तुम एक दिन मेरे साथ चलकर देखो।’’ खुशी के कहने पर राहुल उन गरीब बच्चों को मैथ पढ़ाता है। बच्चों के साथ टाइम बिताकर उसे आनन्द की अनुभूति होती है।
‘‘मैं भी तुम्हारी तरह डिप्रेशन में चली गई थी मगर इन बच्चों के साथ ने मुझे उससे बाहर निकाल दिया।’’
‘‘तुम तो इन बच्चों की खुशी हो। क्या मैं तुम्हें ज्वाॅयन कर सकता हूं?’’ राहुल ने पूछा।
‘‘क्या मैं तुम्हारी भी खुशी बन सकती हूं? यह कहकर वह जोर से हंस पड़ी। दुनिया से रूठे राहुल की ठहरी हुई घड़ी की सूइयां एक बार फिर टिक-टिक कर चल पड़ी।

लेखकः मनोज सिन्हा (वरिष्ठ पत्रकार)

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