एनजीओ से मिले 2.04 करोड़ रुपए से Startup शुरू किया

हांगकांग में पली-बढ़ी 32 साल की आकांक्षा हजारी ने डेढ़ साल पहले मुंबई में एम.पानी (m.paani) नाम से एक स्टार्टअप शुरू किया । यह एक लॉयल्टी प्लैटफॉर्म है जो छोटे दुकानदारों और कस्टमर्स को जोड़ता है। आकांक्षा का इरादा इसे अलीबाबा की तरह ग्लोबल प्लैटफॉर्म बनाने का है।आकांक्षा 2010 में कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान हल्ट फाउंडेशन की कॉम्पिटीशन में भाग लेने के लिए उन्होंने दोस्तों की एक टीम बनाई। फाउंडेशन ने पानी के संकट पर बिजनेस प्लान बनाने को कहा। हॉलीवुड स्टार मैट डैमन के संगठन water.org को एडवाइजर रखा गया। प्राइज में मिले पैसे इसी संगठन को देने थे। आकांक्षा की टीम ने वहीं एम.पानी नाम से कस्टमर लॉयल्टी प्रोग्राम बनाया।  इसका मकसद गरीबों को साफ पानी मुहैया कराना था। आकांक्षा की टीम कॉम्पिटीशन जीत गई। 10 लाख डॉलर (6.8 करोड़ रु.) की प्राइज मनी मांगने पर water.org ने कहा कि उन्हें एनजीओ के लिए काम करना होगा। आकांक्षा नहीं मानीं।  तीन साल बाद भी मैट डैमन के संगठन से पैसे नहीं मिले तो हल्ट ने उन्हें तीन लाख डॉलर (2.04 करोड़ रु.) दिए। उन्होंने इसी पैसे से मुंबई में काम शुरू किया। आज उनके प्लैटफॉर्म से 200 दुकानदार और 10,000 कस्टमर्स जुड़ चुके हैं।  

एम.पानी का लॉयल्टी प्रोग्राम एक क्रेडिट कार्ड के प्वाइंट की तरह काम करता है। जब भी कस्टमर नेटवर्क में शामिल दुकानदार से कुछ खरीदता है, तो उसके खाते में प्वाइंट्स जुड़ जाते हैं।  फ्यूचर में वह इन प्वाइंट्स का इस्तेमाल नेटवर्क की दुकानों में खरीदारी के लिए कर सकता है। आकांक्षा कहती हैं कि इस प्लैटफॉर्म से लोगों की बाइंग कैपिसिटी बढ़ेगी। प्वाइंट्स के आधार पर वे थोड़ा ज्यादा खरीद सकेंगे। दुकानदारों को भी फायदा है।  हालांकि वो यह भी कहती हैं कि यह सब वह मुनाफे के लिए करती हैं। हर खरीद पर वह दुकानदारों से कमीशन लेती हैं।

आकांक्षा मानना है कि बिजनेस में लोगों का जिंदगी बदलने की कैपिसिटी है। हिलेरी क्लिंटन का एनजीओ Vital Voices Global Partnership आकांक्षा को 9 मार्च को सम्मानित करेगा।

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