एनजीओ पर भारत के कड़े रुख से जर्मनी ने कहा ‘सरकार और एनजीओ के बीच पारदर्शिता की जरुरत’

भारत में कई गैर सरकारी संगठनों के खिलाफ सरकार की कार्रवाई पर अमेरिका के बाद अब जर्मनी ने भी नाराजगी जताई है। जर्मनी ने भारत से उन गैर सरकारी संगठनों का समर्थन करने को कहा है जो एनजीओ मोदी सरकार की दंडात्मक कार्रवाई का सामना कर रहे हैं। जर्मन राजदूत माइकल स्टेनर ने नई दिल्ली के एक कार्यक्रम में कहा, 'एनजीओ भारत में प्रभावी काम कर रहे हैं। मुझे लगता है कि मूल रुख उनके काम का समर्थन करने का होना चाहिए।'

अपनी बात के समर्थन में राजदूत ने कैलाश सत्यार्थी के एनजीओ 'बचपन बचाओ आंदोलन' को मिले नोबल पुरस्कार की बात कही । स्टेनर ने गैर सरकारी संगठनों का समर्थन करते हुए अधिकारियों और संस्थाओं के बीच पारदर्शिता की बात पर जोर दिए। साथ ही उन्होंने कहा कि भारत को इन एनजीओ के होने पर गर्व होना चाहिए। 

जर्मन राजदूत माइकल स्टेनर की इन आलोचनाओं से एक दिन पहले ही अमेरिकी राजदूत रिचर्ड वर्मा ने भी एनजीओ के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई को लेकर सरकार के खिलाफ नाराजगी जताई थी। आपको बता दें कि मोदी सरकार ने अमेरिका के फोर्ड फाउंडेशन की ओर से भारत की कई एजेंसियों को मदद दिए जाने पर ऐतराज किया है और उसे निगरानी सूची में रख दिया है। ग्रीनपीस इंडिया जैसे संगठनों को विदेशी मदद पर रोक भी लगाई है। सरकार ने विदेशी मदद पाने वाले 9000 एनजीओ के लाइसेंस इस आधार पर रद्द कर दिए हैं कि इन संगठनों ने विदेशी सहायता कानून का उल्लंघन किया है।

 

NGO पर भारत के कड़े रुख से जर्मनी ने कहा 'सरकार और एनजीओ के बीच पारदर्शिता  की जरुरत'  

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