भूखा विभाग निगल रहा बच्चों का आहार !

सिद्धार्थनगर:  परिषदीय विद्यालयों में मिड-डे-मील की व्यवस्था से सबकी भूख मिट रही है। कोई स्कूल बंद करके भूख मिटा रहा तो कोई उपस्थिति अधिक दिखाकर। साहब हो या कर्मचारी, गुरुजी हो या रसोइया या फिर गांव के कथित माननीय, सभी के पेट का निवाला बच्चों का ही आहार है। हालात तो इतने खराब हैं जैसे कि चोरी करने और कराने की नई पाठशाला चालू कर दी गयी हो, जिस पर शासन-प्रशासन की नजर बंद है।

गुरू द्रोणाचार्य ने भक्त एकलव्य से शिष्यता प्रदान करने के बदले अंगूठा मांग लिया। शिष्य ने बड़े गर्व से अंगूठा काटकर दान दे दिया, लेकिन मौजूदा परिदृश्य मांगने की नहीं, मिल बांट कर खाने की हो गयी है। सरकार ने मोटी रकम दी है पढ़ाने के लिए। इससे घर की दाल रोटी नहीं चलती, तभी तो बच्चों के भोजन पर भी कुदृष्टि है। गुरुजनों की अंतरात्मा भले ही इस काम से उन्हें रोकती हो, लेकिन गाहे-बगाहे चोरी के वे भी हिस्सेदार बनते जा रहे हैं। तहकीकात में देखिए मिड-डे-मील से भूख मिटाने का खुलासा।

केस एक- दिन शनिवार, समय 9.35 पूर्व माध्यमिक धेंसा नानकार। बच्चे भोजन के बाद खेलते हुए। नामांकन कक्षा छह में 77, सात में 147, आठ में 137। उपस्थिति क्रमश: 45, 42 व 37। यानी कुल बच्चे 361 के सापेक्ष महज 124 उपस्थिति। मिड-डे-मील रजिस्टर को सच माने तो 23 जुलाई को 274 और 24 जुलाई 227 बच्चों ने भोजन किया है। एक दिन बाद अचानक इतनी कम संख्या पर प्रधानाध्यापक का तर्क है कि बच्चे आज कुछ कम आए हैं। खेती-बारी का मौसम है।

केस दो- पूर्व माध्यमिक विद्यालय सेमरियांव। समय 10.10 बजे। कक्षा 7 में मौजूद पांच बच्चे। कक्षा 6 और 8 खाली। कुल नामांकन 82। हाजिरी में 22 दर्ज। कक्षा सात की बबिता, सफीकुनिशा, ध्रुव कुमार, विजय, सर्वेश की माने तो कक्षा 6 और 8 का क्लास नहीं चला। रसोइया ने कहा कि 15-20 बच्चों का भोजन बना था। करीब यही संख्या तीन-चार दिन पहले की रही है। मिड-डे-मील के रजिस्टर के अनुसार 22 जुलाई को 50, 23 को 52 और 24 जुलाई को 56 बच्चों ने भोजन किया है। प्रधानाध्यापक ने कहा कि देखिए, बच्चे तो आए थे, पड़ोस में झगड़ा हुआ तो चले गये। यह सही है कि 5-7 की संख्या बढ़ा दी जाती है। भोजन का रेट इतना कम है कि खर्च नहीं निकल पाता। बैठौनी का भी तो दौर चल रहा है। गुरुजी ने अपनी मजबूरी भी बतायी और कहा कि मैं अकेला हूं। गैस सिलेंडर से लेकर कापी किताब तक कि व्यवस्था हमें ही करना पड़ता है। बगल के प्राइमरी स्कूल में भी यही आंकड़ों का खेल।

केस तीन- प्राथमिक विद्यालय धुसरी बुजुर्ग। मौजूद 28 बच्चे। शिक्षा मित्र अवधेश कुमार चतुर्वेदी व सावित्री देवी पढ़ाते हुए। प्रधानाध्यापक का पता नहीं। रजिस्टर भी नहीं। बच्चों ने बताया कि उन्हें कभी भोजन नहीं मिलता। घर से लाना पड़ता है। पिछले वर्ष कुछ दिन मिला था, लेकिन इस बार तो बिल्कुल नहीं। शिक्षा मित्र की माने तो प्रभारी इमरान अंसारी कभी आते नहीं। इसकी रिपोर्ट बीइओ ने भी लगायी है। रजिस्टर उन्हीं के पास है। मिड-डे-मील भी उन्हीं के भरोसे नहीं बन रहा है। पिछले दो वर्ष से न तो छात्रवृत्ति मिली और न ही ड्रेस। सिर्फ किताब मिली है। बगल के पूर्व माध्यमिक विद्यालय का ताला बंद मिला। ग्रामीणों की माने तो यह सिर्फ 15 अगस्त और 26 जनवरी को खुलता है। यहां तैनात प्रधानाध्यापक इमरान अंसारी आते नहीं। सहायक अध्यापिका बड़े घर की बेटी हैं। साहब ने छूट दे रखी है। प्रधान व प्रमुख जी को भी यह अव्यवस्था नहीं दिखती।

घड़ी की सूई 11.15 पर पहुंची। इस दौरान प्राथमिक विद्यालय सरौता में ताला लग चुका था। विद्यालय के सामने लगे इंडिया मार्क पंप पर मौजूद गांव की अकाली देवी ने बताया कि अभी आधे घंटे पहले स्कूल बंद हुआ है। बच्चे भी नहीं आ रहे हैं। 11.30 बजे प्राथमिक विद्यालय धुसरी खुर्द में भी ताला लटक रहा था। बाहर खेल रहे बच्चों ने बताया कि इस सत्र में अब यहां कोई पढ़ाने नहीं आया, बच्चे लौट जाते हैं। प्राथमिक विद्यालय लमतीहवां, गंगाराम महदेवा, कटया में भी बीइओ की मनमौजी से आंकड़ों का खेल चल रहा है। कमोवेश यह स्थिति हर स्कूलों की है।
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फर्जीवाड़ा गुरुजी की मजबूरी
रजिस्टर में फर्जी छात्र संख्या लिखने की मजबूरी है। एक अध्यापक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यदि अधिकारी कमीशन न मांगे तो यह नौबत नहीं आती। 15 से 20 फीसद ग्राम प्रधान को तो 10 फीसद बीइओ को देना पड़ता है। हिस्सा ऊपर तक जाता है। अंतरात्मा को यह सब मंजूर नहीं है, लेकिन विभागीय मजबूरी है। विभाग ही चोर बना रहा है। भोजन का रेट भी कम है। इस महंगाई के युग में 3.34 रुपये की दर से प्राइमरी एवं 5 रुपये की दर से जूनियर के बच्चों का पेट कैसे भरेगा? फर्जी संख्या के आधार पर ही खर्च निकल पाता है।
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''मिड-डे-मील में कमीशन की बात बेबुनियाद है। प्राइमरी विद्यालय धुसरी में जानकारी मिली है कि भोजन नहीं बन रहा है। इस पर संबंधित प्रभारी को कारण बताओ नोटिस दी गयी है। सहायक अध्यापिका हेमलता जायसवाल मेडिकल अवकाश पर चल रही हैं। अनियमितताओं के चलते प्राइमरी विद्यालय धुसरी खुर्द की अध्यापिका फरजाना खातून को पहले निलंबित किया गया था। शिक्षकों की कमी है। मजबूरी में अब बहाल किया गया है। सोमवार से बंद स्कूल खुलेगा। बहुत जल्द अब स्कूलों की क्रास चेकिंग की जाएगी। लापरवाही पर संबंधित के खिलाफ कठोर कार्यवाही होगी। -डा. कौशल किशोर,  बीएसए, सिद्धार्थनगर

सभार- दैनिक जागरण 

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