क्या है जीका वायरस ? भारत सहित कई देशों के लिए जारी हुआ अलर्ट ।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने मच्छर से फैलने वाले खतरनाक जीका वायरस के लिए भारत सहित कई देशों के लिए अलर्ट जारी किया है। डब्ल्यूएचओ ने एक आपातकालीन टीम का गठन किया है। इस वायरस को भारत के लिए भी खतरनाक बताया जा रहा है क्यों कि यह एडीज मच्छरों से फैलता है और भारत में इस एक बड़ा घर है।


ब्राजील समेत कई  देशों में जिका वायरस का हमला तेज हो गया है। खबर यह है कि दुनिया के कम से कम 22 देशों में यह वायरस फैल चुका है और लैटिन अमेरिकी देश इसकी सबसे ज्यादा चपेट में हैं। जीका वायरस दुनियाभर के डॉक्टरों और स्वास्थ्य से जुड़े वैज्ञानिकों के सामने नई चुनौती बनकर सामने आया है। WHO का  शुरुआती अनुमान है कि तीस से चालीस लाख लोग इस बीमारी की चपेट में हो सकते हैं।

क्या हैं जीका के लक्षण
• जीका लक्षण बच्चों और बड़ों में इसके लगभग एक ही जैसे होते हैं जैसे बुखार, शरीर में दर्द, आंखों में सूजन, जोड़ों का दर्द और शरीर पर रैशेस यानी चकत्ते हो जाते हैं
• कई लोगों में इसके लक्षण नहीं भी दिखते
• कुछ मामलों में यह बीमारी नर्वस सिस्टम को ऐसे डिसऑर्डर में बदल सकती है, जिससे पैरलिसिस भी हो सकता है
• जीका की बीमारी से सबसे ज़्यादा ख़तरा गर्भवती महिलाओं को है, क्योंकि इसके वायरस से नवजात शिशुओं को माइक्रोसिफ़ेली होने का ख़तरा है।
• बीमारी से बच्चों के मस्तिष्क का पूरा विकास नहीं हो पाता और उनका सिर सामान्य से छोटा रह जाता है

इस वायरस से ऐसी बीमारी हो रही है, जिससे बच्चों में मस्तिष्क का विकास रुक जाता है और उनके मस्तिष्क का आकार भी सामान्य से छोटा हो जाता है। 

इस बिमारी के चपेट में सबसे ज्यादा प्रभावित देश ब्राजिल है। अक्टूबर से अब तक इसके 4,120 संदिग्ध केस ब्राज़ील में आ चुके हैं। यहां की सरकार के मुताबिक, वहां के इतिहास में यह किसी भी बीमारी का सबसे घातक आक्रमण है।

जीका संक्रमण को रोकने के लिए ब्राजील ने अपनी सेना के करीब सवा दो लाख सैनिकों को भी लगा दिया है। ये सैनिक घर-घर जाकर लोगों को जीका के प्रति सचेत करेंगे और पोस्टरों के जरिये जागरूक करने की कोशिश करेंगे।

वैज्ञानिकों के अनुसार इस खतरनाक जिका वायरस से लड़ने में मददगार टीका इस वर्ष के आखिर तक आ सकता है। लेकिन आम लोगों तक जीका का टीका पहुंचने में अभी समय तक लग सकता है इसी कारण है कि सबका जोर इस बीमारी को फैलने से रोकने पर है। टीका तैयार करने में अमेरिका और कनाडा के वैज्ञानिक लगे हुए हैं। इस परियोजना से वैज्ञानिक डेविड वेनर के नेतृत्व में पेन्सिलवेनिया विश्वविद्यालय, गैरी कोर्बंगर के नेतृत्व में लावल विश्वविद्यालय, इनोवियो फार्मास्यूटिकल्स इंक और दक्षिण कोरिया के जीवीवन लाइफ साइंस जुडे हैं।

 

जानिए इस बीमारी का इतिहास

• 1947 में यूगांडा के ज़ीका के जंगलों में बंदरों में यह वायरस पाया गया। इसी से इस वायरस का नाम ज़ीका पड़ा।
• 1954 में पहले इंसान के अंदर ये वायरस देखा गया। इसके बाद कई दशक तक ये इंसानी आबादी के लिए बड़े ख़तरे के तौर पर सामने नहीं आया और यही वजह रही कि वैज्ञानिक समुदाय ने इसकी ओर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया।
• 2007 में माइक्रोनेशिया के एक द्वीप याप में इस वायरस ने बड़ी तेज़ी से पैर पसारे और फिर यह वायरस कैरीबियाई देशों और लेटिन अमेरिका के देशों में फैल गया।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने आगाह किया कि जीका विषाणु ‘भयानक तरीके से’ अमेरिकी देशों में फैल रहा है और 40 लाख तक लोगों को संक्रमित कर सकता है। संगठन ने साथ ही भारत सहित उन सभी देशों को एक चेतावनी जारी की जहां ऐडीज मच्छरों के वाहक पाए जाते हैं जो डेंगू और चिकुनगुनिया को भी जन्म देते हैं। ऐडीज ऐगिपटाए मच्छर जिका विषाणु को जन्म देते हैं, जो डेंगू और चिकुनगुनिया भी फैलाता है। 

(स्रोत- एजेंसी)

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