इंदिरा जयसिंह की NGO लायर्स कलेक्टिव का लाइसेंस छह महीने के लिए निलंबित

प्रख्यात वकील इंदिरा जयसिंह के गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) Lawyers Collective का FCRA लाइसेंस छह महीने के निलंबित कर दिया गया। इससे अब इस एनजीओ को विदेश से धन नहीं मिल सकेगा। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने लाइसेंस निलंबित करते हुए एनजीओ से पूछा है कि वह विदेश योगदान नियमन अधिनियम (एफसीआरए) के विभिन्न प्रावधानों के तहत उल्लंघन के मामले में 30 दिन के अंदर जवाब दे। अगर ऐसा नहीं किया तो उनके एनजीओ का पंजीकरण भी रद्द हो सकता है।

इंदिरा जयसिंह के एनजीओ Lawyers Collective पर आरोप है कि उसने वर्ष 2006-07 और वर्ष 2013-14 के बीच विदेशी चंदा पाया। लेकिन यूपीए सरकार में एडीशनल सॉलीसिटर जनरल रहीं जयसिंह ने इसका सालाना रिटर्न नहीं भरा। इंदिरा जयसिंह फिलहाल बतौर सचिव काम कर रही हैं। बताया जाता है कि जुलाई 2009 से 5 मई, 2014 में तत्कालीन एएसजी इंदिरा जयसिंह को 96.60 लाख रुपये की रकम मिली। उसके बाद कई सालों तक यह सिलसिला चलता रहा।

इस कार्रवाई को लेकर कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने गुरुवार को कहा कि मशहूर अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह के गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) Lawyers Collective के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई लोगों के हितों का समर्थन करने वालों के प्रति सरकार के असहिष्णु रवैये को दर्शाती है। दिग्विजय ने ट्विटर पोस्ट में लिखा, वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह को जन मुद्दे को बेखौफ तरीके से उठाने के लिए निशाना बनाया जा रहा है। मोदी सरकार की असहिष्णुता। उन्होंने एक अन्य ट्वीट में लिखा, अधिवक्ताओं क्या आप थोड़ी हिम्मत दिखाओगे और उनके लिए आवाज उठाओगे? अगली बारी आपकी हो सकती है ।

पूर्व अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल इंदिरा एनजीओ की संस्थापक-सचिव व उनके पति आनंद ग्रोवर इसके अध्यक्ष हैं। इंदिरा ने बुधवार को सरकार के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए ट्विटर पर लिखा, एफसीआरए के कथित उल्लंघन के बहाने सरकार द्वारा किए गए हमले की निंदा करती हूं, जो राणा अयूब की किताब के विमोचन कार्यक्रम में मेरे अपनी बातें रखने के कुछ दिनों बाद हुआ। वह पत्रकार राणा अयूब की लिखी किताब गुजरात फाइल्स: द अनैटमी ऑफ अ कवर अप के विमोचन का जिक्र कर रही थीं, जो 2002 के गुजरात दंगों के बारे में है।

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