गैर सरकारी संस्था चाइल्ड एंड नीड इंस्टीच्यूट (सिनी) ने मनाया स्थापना की 40वीं वर्षगाठ ।

रांची : गैरसरकारी संस्था चाइल्ड एंड नीड इंस्टीच्यूट (सिनी) की 40वीं वर्षगाठ के अवसर पर रांचीं के कैपिटोल हिल में समारोह हुआ। मुख्य अतिथि राज्य के प्रभारी मुख्य सचिव सजल चक्रवर्ती ने कहा कि हर कार्य के लिए सरकार के भरोसे नहीं रहा जा सकता। कुछ ऐसे क्षेत्र में भी हैं, जहा गैरसरकारी संस्थाएं (एनजीओ) कार्य करने में सरकार को मदद कर सकती हैं। विकास में सहभागी बन सकती हैं। नक्सल प्रभावित सुदूर गावों में विकास कार्य करने में अधिक परेशानी होती है। ऐसे में सरकार को गैरसरकारी संस्थाओं की जरूरत पड़ती है। 

सिनी के संस्थापक निदेशक डॉ.समीर चौधरी ने संस्था के 40 वर्ष के सफर की संक्षिप्त जानकारी देते हुए कहा कि 1974 में कोलकाता की एक छोटी सी जगह से सामाजिक क्षेत्र में कार्य की शुरुआत की गई थी। संस्था आज बढ़कर पश्चिम बंगाल व झारखंड में विस्तारित हो चुकी है। उन्होंने कहा कि मा, बच्चा व किशोरों के स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा व सुरक्षा के मुद्दों पर संस्था सरकार के साथ मिलकर कार्य करती है।

कार्यक्रम में उपस्थित समाज कल्याण निदेशालय के सहायक निदेशक राजीव रंजन ने कहा कि सरकार राज्य के 38, 432 आगनबाड़ी केंद्रों में स्थानीय स्तर पर मॉनिटरिंग कमेटी का गठन कर चुकी है। आगनबाड़ी केंद्रों का संचालन ठीक तरीके से हो, इसके लिए सिर्फ सरकार पर निर्भरता उचित नहीं, बल्कि समुदाय का क्रियाशील होना जरूरी है। 

समारोह में यूनिसेफ के राज्य प्रमुख जॉब जकारिया, राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन की राज्य कार्यक्रम समन्वयक (सहिया) अकय मिंज, झपाइगो के डॉ.सुरंजन प्रसाद, बाल अधिकार संरक्षण आयोग सदस्य डॉ.सुनीता कात्यायन, सामाजिक कार्यकर्ता बलराम सहित अन्य वक्ताओं ने भी विचार व्यक्त किए। अतिथियों का स्वागत संस्था की वरीय कार्यक्रम पदाधिकारी तन्वी झा व धन्यवाद ज्ञापन अपर निदेशक राजीव हालदार ने किया। 

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