सहकारिता से ही हुआ है डेयरी उद्यमिता का विकास : डॉ. चंद्रपॉल

नई दिल्ली,20 फरवरी। डेयरी उद्यमिता के विकास में सहकारिता की महत्वपूर्ण भूमिका है। भारतीय राष्ट्रीय सहकारी संघ के अध्यक्ष डॉ. चंद्रपाल सिंह यादव ने डेयरी विजन 2030 सम्मेलन के उद्धाटन अवसर पर बोल रहे थे। सम्मेलन का आयोजन प्रगति मैदान के हॉल नंबर 4 व 5 में फिक्सी सोल्युशंस द्वारा आयोजित कार्प एक्सपो के अंतर्गत किया गया।

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डॉ. पाल ने कहा कि 2030 तक देश में दुग्ध उत्पादन और वितरण की व्यवस्था पर चिंतन सहकारिता सर्वोपरि है। इसका सबसे बड़ा लाभ सहकारी समितियों को मिलेगा। दुग्ध उत्पादन में लगी प्राथमिक सहकारी समितियों ने गांवों में रोजगार मुहैया कराने में सबसे बड़ा योगदान दिया है। दुग्ध क्रांति से रोजगार के साथ देश का सम्मान भी बढा है। अमूल, सुधा, पराग आदि ब्रांड जमीन पर मौजूद उत्पादक किसानों की सहकारिता के मार्फत की मदद कर रही हैं। वितरण में लगी सहकारी संस्थाओं को रोजगार मिल रहा है।

इस मौके पर लोकसभा सदस्य नवीन जिंदल ने दुध की गुणवत्ता को सबसे जरूरी बताया। शुद्ध दूध के लिए लोग पैसे की परवाह नहीं रख रहे। उन्होंने डेयरी क्षेत्र में विदेशों में विकसित तकनीक को आत्मसात करने पर जोर दिया।

एक्सपो में देश के कर्इ सफल सहकारी सस्थाएं मसलन कृभको, इफको,टोक्यो, बुलढ़ाना अर्बन कोआप. सोसाइटी, राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम आदि ने अपने उत्पादों के स्टॉल लगाए हैं।  भारतीय राष्ट्रीय सहकारी संघ के मुख्य कार्यकारी ने इस अवसर पर बालेते हुए कहा कि दुग्ध सहकारिताओं के अच्छे काम
क चलते भारत को दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में पहला स्थान प्राप्त हुआ है।

डेयरी विजन-2030 कार्यक्रम के अवसर पर फ्रांस, हॉलैंड, स्वीडन जैसे देश के कर्इ विशिष्ट दुग्ध व्यवसाय प्रतिनिधि इस अवसर पर मौजदू थे। इस सम्मलेन में विभिन्न प्रतिनिधियों के बीच आम राय बनी कि  गायों में दुग्ध उत्पादकता बढा़ने के लिए विभिन्न नर्इ तकनीकों को अपनाना होगा। दुध सबके लिए जरूरी है इसे समझते हुए डेयरी किसानों को विशेष आर्थिक और तकनीकी सहायता देनी होगी ताकि वो आने वाली चुनौती से पार पा सकें।

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