एफसीआरए के उल्लंघन के आरोप में एनजीओ-संस्थानों का रजिस्ट्रेशन रद्द

गृह मंत्रालय ने एफसीआरए के उल्लंघन के आरोप में 1807 एनजीओ और अकादमिक संस्थानों के एफसीआरए रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया है। मंत्रालय के अनुसार फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट (एफसीआरए) के तहत पंजीकृत एनजीओ और अकादमिक संस्थानों पर विदेशों से फंड लेने पर रोक लगा दी गई है। इन सभी संस्थानों पर एफसीआरए नियमों का उल्लंघन करने का आरोप था।  इन संस्थान पिछले छह साल से विदेशी धन प्राप्त करने संबंधी वार्षिक आय और खर्च का ब्यौरा देने में विफल रहे थे, इसलिए इनका रजिस्ट्रेशन रद्द किया गया। इन्हें इसकी जानकारी दी जा रही थी कि एफसीआरए के गाइडलाइंस के मुताबिक, ‘‘रजिस्टर्ड संस्थानों को हर वित्त वर्ष में आय और खर्च का ब्यौरा ऑनलाइन तरीके से जमा करना अनिवार्य होता है।’’ 

 

कानून में संशोधन होने के बाद कई पर हुई कार्रवाईः
नियम यह है कि जिन संगठनों को किसी विशिष्ट वर्ष में विदेशी योगदान नहीं मिलता, उन्हें भी उस वित्त वर्ष के लिए ‘निल’ रिटर्न भरना होता है। जिन संस्थानों के पंजिकरण रद्द हुए हैं उनमें यूनिवर्सिटी ऑफ राजस्थान, इलाहाबाद एग्रीकल्चरल इंस्टीट्यूट, गुजरात का यंग मेन्स क्रिस्चियन एसोसिएशन और कर्नाटक की स्वामी विवेकानंद एजुकेशनल सोसाइटी शामिल है।

एनजीओ इन्फोसिस फाउंडेशन ने खुद ही रजिस्ट्रेशन रद्द करने की मांग की थी। संस्था के अधिकारी के अनुसार, “2016 में कानून में संशोधन के बाद इन्फोसिस फाउंडेशन एफसीआरए के दायरे में नहीं आता था। हमने मंत्रालय से विचार करने की अपील की थी। हमें खुशी है कि उन्होंने इसे स्वीकार किया।” 

इससे पहले वर्ष 2014 में भी गृह मंत्रालय ने चौदह सौसे अधिक संगठनों का एफसीआरए रजिस्ट्रेशन रद्द किया था। 

 

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