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पंचायती राज चुनाव सुधार हेतु महिला जनप्रतिनिधियों की मांग

जयपुर । द हंगर प्रोजेक्ट राजस्थान की ओर से महिला जनप्रतिनिधियों के साथ  जयपुर में आयोजित संवाद कार्यक्रम में आई महिला जनप्रतिनिधियों ने अगले वर्ष राजस्थान में होने वाली पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव के मद्देनजर महिला जनप्रतिनिधियों ने प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष चुनाव सुधार को लेकर महत्वपूर्ण सुझाव देते हुए अपना एक मांग पत्र जारी किया। 

उन्होंने पंचायती राज चुनावों में चुनाव सिंबल मतदान के 10 दिन पहले देने की मांग की ताकि प्रचार का समय मिल पाए। वोटों की गिनती का कार्य पंचायत चुनाव के दौरान सरपंचों एवं वार्ड पंचों के मतगणना को कार्य 2 से 4 दिवस पश्चात ब्लॉक स्तर पर किया जाए।  ग्राम पंचायत चुनाव के दौरान 1 से 2 सप्ताह का समय दिया जाए। 

पंचायती राज विभाग से आए अधिकारियों को महिला सरपंचों ने एक ज्ञापन देकर चुनाव सुधार के लिए और भी महत्वपूर्ण मांगे रखी। पंचायत चुनाव के दौरान गांव वार पोलिंग बूथ बनाने, पंचायत राज के तीनों स्तर के चुनाव हेतु मतदान एक ही दिन में कराने, जिला ब्लाॅक एवं ग्राम पंचायत स्तर हेतु आरक्षित सीट एवं उम्मीदवार की योग्यताओं से संबंधी जानकारी कम से कम 3 माह पूर्व सार्वजनिक रूप से प्रकाशित करने, चुनाव के दौरान सुलभ जानकारी हेतु एक हेल्पलाइन चलाए जाने की मांग भी की। 

महिला सरपंचों मांग रखते हुए यह भी कहा कि पंचायत चुनाव संबंधी तथ्य का संकलन कर ऑनलाइन किया जाए। वोटों की गिनती का कार्य पंचायत चुनाव के दौरान सरपंचों एवं वार्ड पंचों के मतगणना को कार्य 2 से 4 दिवस पश्चात् ब्लॉक स्तर पर किया जाए।  ग्राम पंचायत चुनाव के दौरान 1 से 2 सप्ताह का समय दिया जाए। 

स्थानीय स्वशासन एवं स्थानीय निकायों को सीधे अनुदान का हस्तानांतरण होः-महिला सरपंच संगठनों की ओर से केंद्रीय वित्त आयोग से भी मांग की गई है कि स्थानीय स्वशासन एवं स्थानीय निकायों को सीधे अनुदान का हस्तानांतरण हो। 73वें संविधान की मूल अवधारणा के अंतर्गत पंचायत राज संस्थाओं को 11वीं अनुसूची में वर्णित 29 विषयों का पूर्ण रूपेण हस्तारण किया जाए जिससे ग्राम पंचायतें स्थानीय शासन की महत्वपूर्ण इकाई के तहत विकासात्मक कार्यों का मजबूती के साथ संपन्न कर सके। पंचायत स्तर पर समय पर राशि का हस्तांतरण होता है पर पंचायतों की जनसंख्या एवं क्षेत्रफल दृष्टि से यह राशि प्राप्त नहीं है। केंद्रीय वित्त आयोग की राशि को खर्च करने हेतु ग्राम पंचायत पर शर्त नहीं रखी जाए। वार्ड पंच का मानदेय प्रति बैठक किया जाना चाहिए। कम से कम न्यूनतम मजदूरी के साथ जोड़ा जाए। राजस्थान में विकेन्द्रित प्रक्रिया तहत हस्तांतरित 5 विभागों का बजट सीधा ग्राम पंचायतों में आना चाहिए। आदिवासी क्षेत्रों में पेसा गांव (राजस्व) के लिए बजट प्रावधान उनकी आवश्यकताओं को देखते हुए अलग से रखने का प्रावधान हो।

द हंगर प्रोजेक्ट राजस्थान के कार्यक्रम अधिकारी विरेन्द्र श्रीमाली ने बताया कि द हंगर प्रोजेक्ट राजस्थान महिला जनप्रतिनिधियों के सशक्तिकरण हेतु गत 19 वर्षों से कार्यरत है। वर्ष 2015 के पंचायत चुनाव के पश्चात् लगातार 5 साल से महिला जनप्रतिनिधियों के क्षमतावर्धन का कार्य किया जा रहा है। आज इस संवाद के माध्यम से जनवरी एवं फरवरी 2020 में प्रस्तावित पंचायत राज चुनाव में सुधार के क्रम में पंचायती राज विभाग एवं राज्य निवार्चन आयोग के समक्ष मुद्दों पर संवाद किया गया है। 

संवाद कार्यक्रम में पूर्व प्रशासनिक अधिकारी राजेंद्र भानावत ने कहा कि आप सभी महिला जनप्रतिनिधियों को अपने अधिकारों को हक के साथ लेना होगा। आपकी असली ताकत वे लोग हैं जिन्होंने आप को वोट देकर चुना है। 

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