विविध

  • पंचायती राज चुनाव सुधार हेतु महिला जनप्रतिनिधियों की मांग
  • IL&FS Education wins big at the 53rd Skoch awards
  • बेदाग हुए वैज्ञानिक नंबी नारायणन, अधिकारी ने कहा था, अगर आप बेदाग निकले तो मुझे चप्पल से पीट सकते हैं।
  • जालंधर इंडस्ट्री डिपार्टमेंट एनजीओ के पंजीकरण के लिए कैंप लगाएगा
  • दिल्ली में स्थित नारी निकेतन व महिला आश्रम में अव्यवस्था का बोलबाला, मंत्री ने महिला आश्रम की कल्याण अधिकारी को निलंबित किया

बजट के अभाव में महिला एवं बाल विकास विभाग के सहयोग से संचालित बालगृह की व्यवस्था चरमराई, बच्चों के भूखे पेट सोने की नौबत ।

चालू वित्तीय वर्ष के 11 माह बीतने के बाद भी बजट नहीं मिलने से प्रतापगढ़  के मीरा भवन स्थित बालगृह (बालक) के बच्चे और कर्मचारी दाने-दाने के लिए मोहताज हैं। उनके सामने खाने-पीने का संकट खड़ा हो गया है। हालात ये है कि स्थानीय लोगों की मदद से बालगृह में रहने वाले बच्चों को शाम का भोजन नसीब हो रहा है। 

महिला एवं बाल विकास विभाग के सहयोग से एनजीओ द्वारा संचालित बालगृह के पास वर्तमान में 14 बच्चे हैं। इन बच्चों की पढ़ाई-लिखाई, खान-पान और कपडे़ के लिए प्रतिवर्ष शासन से बजट मिलता है। मगर चालू वित्तीय वर्ष में 11 माह का समय बीतने के बाद भी शासन से बजट नहीं मिला है। ऐसे में बालगृह में तैनात कर्मचारी बच्चों का पेट भरने के लिए आसपास के लोगों की मदद पर निर्भर हैं।  एनजीओ के अध्यक्ष ने द एनजीओ टाईम्स को बताया कि विभाग को बार-बार फंड भुगतान हेतु  अनुरोध पत्र लिखने के बावजूद भी अब तक इस संबंध में कोई कार्यवाही नहीं हुई है, ऐसे में गैर सरकारी संस्थाओं द्वारा ज्यादा वक्त तक परियोजना का संचालान सुचारु रुप से कर पाना संभव नहीं हो पाएगा।


इलाहाबाद, कौशांबी, फतेहपुर और प्रतापगढ़ के नाबालिग बच्चों की देखरेख और खान-पान की जिम्मेदारी बालगृह के कर्मचारियों पर होती है। ऐसे में एनजीओ को बजट नहीं मिलने से बच्चों का पठन-पाठन के साथ-साथ सेहत पर भी प्रभाव पर रहा है। 

Related Article

सुर्खियां

Facebook पर Like करें

Go to top