टाटा समूह के छह ट्रस्टों के रजिस्ट्रेशन रद्द, सेक्शन 115(TD) के प्रावधान के तहत चुकाना पड़ सकता है अतिरिक्त टैक्स !

टाटा समूह के 6 ट्रस्टों के रजिस्ट्रेशन को आयकर विभाग ने रद्द कर दिया। मुंबई के आयकर आयुक्त ने 31 अक्टूबर को इस संबंध में आदेश जारी किया। रद्द किए गए ट्रस्टों के नाम जमशेदजी टाटा ट्रस्ट, आर डी टाटा ट्रस्ट, टाटा एजुकेशन ट्रस्ट, टाटा सोशल वेलफेयर ट्रस्ट, सार्वजनिक सेवा ट्रस्ट और नवजबाई रतन टाटा ट्रस्ट शामिल हैं।

ट्रस्टों ने आयकर विभाग के आदेश पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि रजिस्ट्रेशन कैंसिल करने का फैसला चार साल पहले से लागू होना चाहिए। उन्होंने 2015 में खुद ही रजिस्ट्रेशन त्यागने (सरेंडर) और आयकर में छूट नहीं लेने का फैसला ले लिया था। मामले की जानकारी रखने वाले एक व्यक्ति ने कहा, "ट्रस्टों की दलील है कि उन्होंने अपने लाइसेंस 2015 में सरेंडर कर दिए थे. इसलिए उन पर सेक्शन 115(TD) के प्रावधान लागू नहीं होते हैं, कैंसिलेशन का आदेश पास किया गया है, इसके बाद डिमांड नोटिस भेजा जाएगा, यह रकम करोड़ों में हो सकती है."

रिपोर्ट्स के मुताबिक आयकर विभाग ने आईटी एक्ट की धारा 115 (टीडी) के तहत रजिस्ट्रेशन रद्द करने की कार्रवाई की। एक श्रेणी के ट्रस्टों के मामले में 2016 में आईटी एक्ट में यह विशेष प्रावधान जोड़ा गया था। आयकर कानून के सेक्शन 115 (TD) के अनुसार मुताबिक किसी ट्रस्ट का रजिस्ट्रेशन रद्द होने पर उसे पिछले सालों की उस आय पर भी टैक्स चुकाना पड़ता है जिस पर छूट ली गई हो। कोई ट्रस्ट अगर नॉन-चैरिटेबल ट्रस्ट में मर्ज या कन्वर्ट होता है, तो उसे अतिरिक्त टैक्स भी देना पड़ता है।

क्या है सेक्शन 115 (TD) जानने के लिए इस यूट्यूब थंबनेल लिंक पर क्लिक करेंः

 

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