राष्ट्र-विरोधी नारे लगाने वालों को उठा कर सलाखों के पीछे डालें सरकार- कुमार विश्वास

तक्षशिला, जो दुनिया का सबसे बड़ा शैक्षणिक तीर्थ था, वहाँ के स्नातक और आचार्य चाणक्य ने जब देश पर संकट देखा, तो नौकरी छोड़ कर आक्रांता सिकंदर के खिलाफ पूरे देश का जनमानस तैयार करने निकल पड़े थे। और आज की स्थिति यह है कि ज्ञान का पीठ कहे जाने वाले विश्वविद्यालय में कुछ लोग खुलेआम राष्ट्र-विरोधी नारे लगा दें, या हमारे देश में आतंक फैलाने वाले पडोसी देश के समर्थन में नारे लगाएं, और भारत की न्यायिक व्यवस्था, प्रशासन व्यवस्था और बुद्धिजीवी वर्ग शांत रह जाए, ये दुःख और आश्चर्य की बात है। देश की सरकार से और निरंतर झूठे मुकदमों में हम आम लोगों को परेशान करने वाले, शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे बच्चों पर लाठियाँ बरसाने वाले दिल्ली पुलिस से निवेदन है कि इस मामले में भी कानून-सम्मत निश्चित धाराओं के अंतर्गत कार्रवाई करें और ऐसे हर तथाकथित विद्यार्थी को उठा कर सलाखों के पीछे डालें। इसके साथ ही परिसर के सम्बंधित अधिकारियों को भी सवालों के दायरे में लें, कि उनके रहते उनके परिसर में राष्ट्र-विरोधी नारे कैसे लग गए। इस मौके पर एक उदाहरण स्थापित करना आवश्यक है ताकि भविष्य में यह दुहराया न जाए। 


"तोड़ दो हाथ अगर हाथ उठने लगे
छूने पाए ना सीता का दामन कोई" (-कैफ़ी)

(कुमार विश्वास के फेशबुक वाल से)

 

 

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