वाहन चालकों के अचानक हड़ताल पर जाने से भूखे रह गए नौनिहाल

बिजनौर के नजीबाबाद में आगनबाड़ी केंन्द्रों पर खाना पहुंचाने वाले वाहन चालकों ने पारिश्रमिक में कटौती को कारण बताते हुए मंगलवार को अचानक हीं हड़ताल कर दिया।  जिसका नतीजा यह हुआ कि 392 केंद्रों में से कुछ केंद्रों के नौनिहालों को हीं खाना नसीब हो पाया, बांकी को भूखे पेट घर लौटना पड़ा।

नजीबाबाद ब्लॉक के 392 केंद्रों के लिए दिल्ली की एक एनजीओ द्वारा गांव सरवनपुर में खाना तैयार कर रोजाना वाहनों से आंगनबाड़ी केंद्रों पर भेजा जाता है। मंगलवार को वाहन चालकों ने एनजीओ द्वारा पारिश्रमिक में कटौती के विरोध में हड़ताल कर दी। चालकों ने अनुबंध के अनुसार एनजीओ पर भुगतान न करने का आरोप लगाते हुए हड़ताल करने का तर्क दिया।

प्रभारी सीडीपीओ ने अचानक हड़ताल से अनेक आंगनबाड़ी केंद्रों पर भोजन न पहुंचने की पुष्टि की और कहा कि जिन केंद्रों पर भोजन नहीं पहुंचा है, सूचना एकत्र कर उनके केंद्रों का भुगतान तत्काल प्रभाव से रोक दिया जाएगा तथा एनजीओ से अव्यवस्था के लिए जवाब-तलब किया जाएगा।

एनजीओ से जुड़े एक अधिकारी का कहना है कि चालकों को पारिश्रमिक संबंधित तथा वाहनों को हटाने का भ्रम फैलने से यह स्थिति आई है, इस समस्या का हल जल्द हीं निकाल लिया जाएगा।

वाहन चालकों का अचानक हड़ताल पर जाना जायज नहीं

लेकिन वाहन चालकों का मंगलवार को अचानक हीं हड़ताल पर जाना जायज नहीं ठहराया जा सकता है। हड़ताल पर जाने से पहले उन्हें एनजीओ से बात कर समस्या का हल निकाले की कोशिश करना चाहिए था और हड़ताल पर जाने का नोटिस देना चाहिए था. पुर्व सूचना रहने पर समय रहते एनजीओ द्वारा केन्द्रों पर खाना पहुँचाने का इंतजाम किया जाता और नोनिहालों को भुखे पेट नहीं लौटना पड़ता। हड़ताल के कारण तैयार भोजन का बच्चों में वितरण नहीं होने जिम्मेवार चालक है। तैयार भोजन के बर्बाद हो जाने को लेकर चालकों पर जुर्माना भी लगाया जाना चाहिए ताकि वो भविष्य में इस तरह से अचानक हड़ताल पर न जाएं।  

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