स्टेनो बोला- लैपटॉप दो, ठेका लो

मेरठः मिड-डे मील योजना में बच्चों को भोजन परोसने का काम किन एनजीओ के हाथों में होगा, इसकी आधिकारिक लिस्ट भले ही अभी जारी नहीं हुई हो। लेकिन, उससे पहले ही घूसखोरी का खेल चल रहा है। सीडीओ के स्टेनो ने एनजीओ के चेयरमैन व अन्य पदाधिकारियों से मिड-डे मील का ठेका दिलाने के नाम पर 42 हजार रुपये का लैपटॉप मांग लिया। शिकायत मिलने पर डीएम ने सीडीओ को जांच सौंप दी है।

फोन रिकार्डिंग के जरिये किए गए स्टिंग ऑपरेशन में नेपाल सिंह ने दिल्ली स्थित हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ पॉल्यूशन कंट्रोल एंड सोशल इकोनॉमी डेवलपमेंट से अंतिम सूची में चयनित कराने के लिए डिमांड रखी। एनजीओ के चेयरमैन एनके झा स्टेनो से कहा कि डीएम या सीडीओ साहब तो लेते नहीं हैं तो फिर इतनी मोटी रकम का लैपटॉप वो भी मात्र तीन हजार बच्चों को मिड-डे मील मुहैया कराने के लिए कैसे दें दें। वैसे भी हमारा इतना बजट नहीं है कि 40-42 हजार रुपया खर्च कर दें। जिस पर स्टेनो ने कहा कि चलिए, अगर आप इतना नहीं करा सकते हैं तो इसका 50 प्रतिशत करा दीजिए। बाकी दूसरे एनजीओ से देेख लिया जाएगा। 

बीते साल 24 जुलाई को मिड-डे मील का काम सौंपे जाने के लिए टेंडर जारी हुआ। जिसके बाद 14 अगस्त तक 84 एनजीओ ने आवेदन किया। जिसमें से 24 एनजीओ को शॉर्टलिस्ट किया गया। इसके बाद जिलाधिकारी पंकज यादव ने शॉर्टलिस्ट किए गए एनजीओ के पुराने कार्य का सत्यापन कराने का काम बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय को सौंपा। एनजीओ द्वारा बाकी किए गए कार्य की रिपोर्ट में खेल कर दिया गया। जिला प्रशासन सात एनजीओ का चयन कर चुका है। हालांकि, अभी अंतिम तौर पर उनकी घोषणा नहीं की गई है लेकिन हिमालयन एनजीओ का दावा अंतिम तौर पर चयनित सात में से दो एनजीओ का देवरिया जिले में बेहद खराब रिकॉर्ड रहा है। सरकार का लाखों रुपया इन एनजीओ पर बकाया है। इस पूरे प्रकरण को लेकर एनजीओ ने जिलाधिकारी से भी लिखित शिकायत की है, जिसके बाद प्रशासनिक स्तर से एनजीओ की फाइल ओपन किए जाने की कवायद शुरू कर दी गई है।

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