परिधान बताता है आपका व्यक्तित्व

कई शताब्दी पूर्व जब मानव का दुनिया में पदार्पण हुआ और बितते समय के साथ उसे तम ढ़कने की जरुरत महसूस हूई होगी तभी उसने इसेक तरीके ढुढें होंगे । और बितते वक़्त के साथ जैसे जैसे सभ्यता का विकास होता गया, इंसना वस्त्र की अहमियत समझने लगा। जैसे हीं कला और संस्कृति के विकास हुआ मानव साधारण की अपेक्षा कलात्मक वस्त्र पहनने सीखे। यह उक्ति सत्य ही है कि “वस्त्र व्यक्ति को बनाते हैं” । निस्संदेह परिधान से व्यक्ति का संपूर्ण व्यक्तित्व प्रभावित होता है। व्यक्ति के पहनावे से ही उसके संस्कार एवेम संस्कृति तथा सामाजिक प्रतिष्ठा का पता सहज ही लगाया जा सकता है। वस्त्रों द्वारा ही व्यक्ति कि अभिरुचि परिलक्षित होती है। वस्त्रों का मन पर भी गहन प्रभाव पड़ता है।

भावाभिव्यक्ति के लिए परिधान सर्वश्रेष्ठ साधन हैं। परिधान के द्वारा ही व्यक्ति को समाज में वरियता प्राप्त होती है। आज के युग परिवेश में भोजन की तरह वस्त्र भी मानव के लिए बहुत आवश्यक वस्तु है। परन्तु प्राय: यह बात देखने में आती है की जिन्हें अपनी रूचि के परिधान उपलब्ध नहीं हो पाते हैं उनमे हीन भावना आ जाती है। घर की चारदीवारी में हमने क्या भोजन किया यह तो कोई नहीं जान पाता परन्तु हमारे पहने हुए वस्त्रों को देखते हुए ही हमारी सामाजिक और आर्थिक स्थिति का पता चल जाता है। अतः परिधान व्यक्ति को जीवन की सभी वस्तुओं से अधिक प्रभावित करते हैं। इनके उचित चयन तथा उपयोग का प्रभाव उसके व्यक्तित्व पर पूर्णतया पड़ता है। यहाँ तक की शारीरिक अवगुणों को दबाकर व्यक्तित्व को सुन्दर बनाने में वस्त्रों का महत्वपूर्ण योगदान होता है।

प्रायः हम वस्त्रों के रंग और डिजाईन पर ही अधिक ध्यान देते हैं परन्तु ये नहीं देखते की वस्त्र किस फाइबर से बना है, तथा विभिन्न आयु वर्गों के अनुसार रंगों का चयन भी अलग अलग होता है, जैसे बच्चों पर थोड़े गहरे रंग अच्छे लगते हैं और बड़ों पर थोड़े हलके रंग अच्छे लगते हैं। इसी प्रकार सामाजिक प्रतिष्ठा के अनुसार भी रंगों का चयन किया जाता है। साथ ही मौसम के अनुकूल वस्त्रों का उपयोग करना नितांत आवश्यक है।शरीर के अनुरूप आपके व्यक्तित्व को वे विशेषताएँ प्रदान कर सकें जिसकी आपको आवश्यकता है। ये जानना भी ज़रूरी है की आधुनिकतम फैशन क्या है।

परिधान चुनते समय यह देखना नितांत आवश्यक है की परिधान की शैली आपकी जीवन शैली से मेल खाती है ये नहीं, क्या वह आपको वही रूप दे सकता है जैसा आप अपने को दिखाना चाहते हैं, क्या वह परिधान जिसको आप पहन रहे हैं, वह आपको गरिमा, प्रतिष्ठा, गौरव, तथा शोभा भी प्रदान करता है या नहीं। शेक्सपीअर ने ठीक हीं कहा था “The apparel often proclaims the man”, ऐसा कह उसने वस्त्र के महत्व व व्यक्ति की अभिरुचि को दर्शाया है। व्यक्ति समयानुकुल वस्त्रों का विवेकपूर्ण चुनाव करते हैं, प्रायः किसी समारोह में जाने पर सुन्दर व शालीन परिधान से सुसज्जित व्यक्ति पर सबकी निगाहे जाती हैं, और उसके व्यक्तित्व का आकर्षण उनके स्मृतिपटल पर अधिक देर तक छाया रहता है।

हमें यह याद रखना चाहिए कि साधारण वस्त्रों से भी अच्छे परिधान बनाकर व्यक्तित्व की खूबियों को निखारकर उसे अधिक सुन्दर दिखा सकते हैं, इसके लिए उसे अधिक परिष्कृत रूचि का प्रयोग करना होगा, व्यक्तित्व के निखार के लिए शरीर की रचना से परिधान की अनुकूलता देखना आवश्यक है। इसके साथ ही समय और अवसर के अनुकूल परिधान का चयन भी आवश्यक है, सही परिधान का चुनाव करते समय यह देखना होगा की वह बच्चा, युवा, प्रौढ़ किस आयु वर्ग में आता है, क्योंकि जो वस्त्र बच्चो पर अच्छे लगते हैं वो बड़ों पर अटपटे लगेंगे, परिधान चयन में विशेष आयु वर्ग के अनुसार रंगों में भी सावधानी बरतनी चाहिए, त्तात्पर्य है की वस्त्रों का चयन करते समय इस बात का ध्यान रखा जाए की परिधान समयोचित हों, औपचारिक अवसरों एवं स्थानों के लिए परिधानों का चयन इस प्रकार हो जिनसे गंभीरता, शालीनता, तथा सौम्यता प्रकट हो।

वस्त्र का चयन करते समय ध्यान रखना चाहिए कि वह व्यक्ति की कार्य कुशलता के परिचायक हों, पहनावे के वस्त्र न बहुत मोटे होने चाहिए न बहुत महीन, पारदर्शी वस्त्रों को सोच विचारकर साथ ही थोडा रूप परिवार्तित करके पहनें। बदलती जीवन शैली में पश्चिमी परिधान आज के संघर्षमय जीवन के ज्यादा अनुकूल माने जाते हैं, लड़के लड़कियों को अपनी पढाई और कार्य स्थल के सम्बन्ध में बड़ी दूरियों को पार करके जाना पड़ता है, कई जगह बसें बदलनी पड़ता हैं, पश्चिमी परिधानों को पहनकर चढ़ना-उतरना भागना-दौड़ना इत्यादि शारीरिक गतिविधियाँ सुविधा से संपन्न होती हैं, इन परिधानों में लचीलापन तथा फिटिंग वाला होने के कारण लम्बे समय तक सुन्दर व क्रीज़ युक्त बने रहते हैं, इसी कारण ये परिधान आजकल अत्यंत लोकप्रिय हो रहे हैं। अतः परिधान खरीदते समय वर्तमान फैशन औए प्रचलित शैली का ज्ञान होना ज़रूरी है। बस केवल ध्यान देना होगा कि परिधान का चयन करते समय व्यक्ति के व्यक्तित्व में झलकता निखार तथा सुन्दरता परिलक्षित होती रहे।

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