आनंद जोशी ने किया खुलासा, CBI की पूछताछ में कहा कि Ford Foundation से प्रतिबंध हटाने के लिए 250 करोड़ का ऑफर था

एनजीओ को गैर-कानूनी तरीके से एफसीआरए मामले मे नोटिस भेजने और कई संस्थओं के फाईल गायब करने के  मामले में गिरफ्तार गृह मंत्रालय के अवर सचिव आनंद जोशी ने सीबीआई के सामने कई सनसनीखेज खुलासे किए हैं । जोशी ने सीबीआई की पूछताछ में कहा है कि फोर्ड फाउंडेशन पर प्रतिबंध हटाने के सिलसिले में 200 से 250 करोड़ रुपये के लेन-देन की बात चल रही थी।  जोशी ने अपने पर लगे आरोपों और उच्च अधिकारियों  के  फैसले पर कई तकनीकी सवाल खड़े किए हैं और वह तकनीकी कारणों से इसके विरोध में थे । एक खबर के अनुसार जोशी का तबादला 31 दिसंबर को फॉरेनर्स डिविजन से पार्लियामेंट डिविजन में कर दिया गया और इनके तबादले के करीब 15 दिन बाद फोर्ड फाउंडेशन को प्रतिबंध सूची से हटा दिया गया। तकनीकी तौर इस फैसले के बाद फोर्ड को विदेशी धन के लिए गृह मंत्रालय के मंजूरी की जरूरत नहीं थी।

खबर है कि जोशी ने कहा है कि सीबीआई फोर्ड फाउंडेशन से प्रतिबंध हटाए जाने की जांच करे। इससे एनजीओ और सरकारी अधिकारियों की सांठगांठ के कई नए मामले सामने आएंगे। गौरतलब है कि जोशी के अधिकारी बीके प्रसाद 31 मई को सेवानिवृत्त हो रहे हैं।  जोशी ने गायब होने से पहले अपनी पत्नी को लिखी चिट्ठी में कहा था कि उन पर फोर्ड फाउंडेशन से प्रतिबंध हटाने के लिए उच्च अधिकारी की ओर से जबरदस्त दबाव था ।  इस नौकरी में उन्होंने अपने कई दुश्मन बना लिए हैं।

जोशी पर आरोप है कि उन्होंने करीब 50 एनजीओ को गैरकानूनी तरीके से FCRA नोटिस भेजे थे। इसके अलावा गुजरात की स्वयंसेवी कार्यकर्ता तीस्ता सितलवाड़ की संस्था सबरंग ट्रस्ट की फाइलें अपने घर ले गए थे जो उनके अधिकार क्षेत्र के बाहर था। आरोप के जवाब में जोशी ने कहा कि बिना उच्च अधिकारी के आदेश के वह एक-दो एनजीओ को तो नोटिस भेज सकते हैं लेकिन इतने संस्थानों को नहीं। जोशी ने सीबीआई की ध्यान इस ओर भी खींचा है कि उनका तबादला दिसंबर 2015 में हो गया था। जबकि विभाग से संबरंग ट्रस्ट की फाइलें मार्च 2016 में निकाली गई थी।

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