एनजीओ को विदेशी सहायता लेने के लिए दी गई इजाजत की समीक्षा की तैयारी में गृह मंत्रालय।

नई दिल्ली। गृह मंत्रालय एनजीओ को विदेशी सहायता लेने के लिए दी गई इजाजत की समीक्षा की तैयारी में जुट गया है। इसके बाद देश के विकास में रोड़ा बनने वाले गैर-सरकारी संगठनों [एनजीओ] पर गाज गिर सकती है। अगर समीक्षा के दौरान खुफिया ब्यूरो के आरोप सही पाए गए तो इन गैर-सरकारी संगठनों को विदेशी सहायता लेने से प्रतिबंधित भी किया जा सकता है। आइबी ने अपनी रिपोर्ट में कई एनजीओ पर विदेशी ताकतों के इशारे पर देश के विकास में रोड़ा अटकाने का आरोप लगाया था।

विदेशी सहायता लेने के लिए विदेशी सहायता नियामक कानून [FCRA] के तहत एनजीओ को यह बताना पड़ता है कि विदेश से मिलने वाली मदद का उपयोग सामाजिक कामों के लिए किया जाएगा। गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, आइबी रिपोर्ट से साफ है कि कुछ एनजीओ विदेशी सहायता का उपयोग सामाजिक कामों के लिए न कर देश के विकास में बाधा डालने के लिए कर रहे हैं। जो कि एफसीआरए के प्रावधानों के खिलाफ है।

 

आइबी रिपोर्ट में जिन एनजीओ पर आरोप लगाए गए हैं, उन्हें मिली एफसीआरए क्लीयरेंस की समीक्षा की जाएगी। इन एनजीओ को अपनी सफाई देने का मौका भी दिया जाएगा। एफसीआरए के प्रावधानों का उल्लंघन साबित होने की स्थिति में उनको मिलने वाली विदेशी सहायता पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है।

खुफिया ब्यूरो ने 3 जून, 2014 को एक गोपनीय व विस्तृत रिपोर्ट देकर देश के विकास में रोड़ा अटकाने वाले कुछ एनजीओ के प्रति आगाह किया था। रिपोर्ट में कहा गया है कि जातिगत भेदभाव, मानवाधिकार उल्लंघन और बड़े बांधों के खिलाफ लामबंद ये एनजीओ अब सारा जोर विकास दर धीमी करने वाले अभियान पर लगा रहे हैं। इनमें खनन उद्योग, जीन आधारित फसलों, खाद्य, जलवायु परिवर्तन और नाभिकीय मुद्दों को हथियार बनाया गया है।

 

गृह मंत्रालय एनजीओ को विदेशी सहायता लेने के लिए दी गई इजाजत की समीक्षा की तैयारी में।

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