महिला और बाल विकास मंत्रालय ने बच्चों और गर्भवती महिलाओं में कुपोषण से निपटने के लिए फंड में 50 फीसद की कटौती की, कुपोषण के खिलाफ लड़ाई पर पड़ेगा असर

बच्चों और गर्भवती महिलाओं में कुपोषण से निपटने की योजनाओं के लिए वर्ष 2015-16 के बजटीय सहायता में करीब 9,000 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गई है। यह जानकारी 30 अप्रैल, 2015 को राज्य सभा में एक प्रश्न  के उत्तर में महिला और बाल विकास मंत्री श्रीमती मेनका संजय गांधी ने दी ।

महिला और बाल विकास की योजनाओं के लिए दी जाने वाली राशि में पिछले साल के मुकाबले इस साल 50 प्रतिशत की कमी की गई है। महिला और बाल विकास मंत्रालय ने बच्चों और गर्भवती महिलाओं में कुपोषण से निपटने के लिए फंड में 50 फीसद की कटौती का असर कुपोषण के खिलाफ लड़ाई पर पड़ सकता है।

2013-14 की तुलना में इस वर्ष फंड आवंटन में भारी कटौती  है, 2014-15 में मंत्रालय का योजना परिव्यय 21,000 करोड़ रुपये था जो 2015-16 में घटाकर 10,286.73 करोड़ रुपये कर दिया गया।

एकीकृत बाल विकास योजना के लिए सबसे ज्यादा 8335.77 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। यह गत वर्ष आवंटित 18,195 करोड़ रुपये से काफी कम है। योजना करीब 7,067 चल रही परियोजनाओं के नेटवर्क और करीब 13.42 लाख आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से चलाई जाती है। इस योजना के अंतर्गत बच्चों के पूरक पोषण, प्री-स्कूल शिक्षा और रोग प्रतिरक्षण जैसी सेवाएं आती हैं। मंत्रालय के बजट का करीब 86.23 प्रतिशत अकेले इस योजना में खर्च होता है।

किशोरी बालिकाओं के सशक्तिकरण योजना के लिए 75.50 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। जबकि इसके लिए प्रस्तावित मांग 700 करोड़ रुपये है। अधिकारी ने बताया कि इस योजना में पिछले वर्ष 630 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे। इसी तरह इंदिरा गांधी मातृत्व सहयोग योजना के लिए 438 करोड़ रुपये और राष्ट्रीय पोषण मिशन के लिए 205.79 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।

इस तरह से महिला व बाल विकास फंड में 50 फीसद की कटौती का असर देश भर में चल रही आईसीडीएस परियोजना पर पड़ेगा। पहले से हीं बजट की कमी से गुणवत्ता पुर्ण आहार की पुर्ति करने में हो रही कठीनाई और बढ़ जाएगी, जिसका सीधा असर कुपोषण से लड़ने की कवायद पर होगा। यह परियोजना मीड-डे-मील परियोजना से अलग छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं एवं बालिकाओं को कुपोषण से मुक्त करने के लिए है, अगर सरकार ऐसे बजट में कटौती करती रही तो, देश में कुपोषण से खिलाफ लड़ाई की धार कुदं हो जाएगी।

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