सीएसआर के नये नियमों को प्रभावी करने के लिए अधिसूचना जारी, राजनीतिक दलों को भी अब “सीधे या परोक्ष रूप से” धन नहीं दे सकते हैं कॉरपोरेट घराने

दिल्ली : बहुप्रतीक्षित सीएसआर के नए नियमों पर गहन विचार-विमर्श के बाद अंतिम रूप दे दिया गया. इसे 1 अप्रैल 2014 से प्रभावी करने के लिए अधिसूचना भी जारी कर दी गई। नये नियम के आने से औधोगिक घरानों द्वारा राजनीतिक दलों को मिलने वाला दान भी अब सीएसआर के दायरे से बाहर हो जाएगा। ये नये मानदंड विदेशी कंपनियों पर भी लागू होगा। वो कंपनियां जिनकी शाखाएं या परियोजना कार्यालय भारत में है उन्हें अपनी सभी सीएसआर गतिविधियों को भारत में हीं करना होगा।

 

कंपनियों द्वारा सीएसआर (कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व ) से संबंधित खर्च के लिए कंपनी अधिनियम, 2013 के खंड 135 और अनुसूची 7 को प्रभावी बनाने के लिए ये कवायद हुई है. कॉरपोरेट मामलों के मंत्री श्री सचिन पायलट ने कहा कि सभी हितधारकों के साथ व्यापक विचार-विमर्श के बाद इन नियमों को अंतिम रूप दिया गया है। इन नियमों को इस प्रकार तैयार किया गया है कि सीएसआर समिति, सीएसआर नीतियों पर नियंत्रण तथा इसका प्रारूप तैयार करेगी, सीएसआर गतिविधियों को समझेगी, निदेशक बोर्ड की भूमिका और बोर्ड रिपोर्ट में सीएसआर गतिविधियों की लेखा-जोखा जारी करने का प्रारूप तय करेगी। 

इस नये कंपनी कानून के दायरे में लगभग 16000 कंपनियां आने वाली हैं। 5 करोड़ रुपये और इससे अधिक की लाभ वाली कंपनियों के लिए सीएसआर अनिवार्य हो जाएगा। कंपनियों को अपने तीन साल के औसत लाभ का कम से कम दो प्रतिशत हर वर्ष सीएसआर गतिविधि पर खर्च करना होग।. जिन कंपनियों पर ये नियम लागू होंगी उसके लिए मुख्य पैमाने कुछ इस तरह है-

• 1,000 करोड़ रुपये और उससे अधिक के कारोबार के वाली सभी कंपनी

• 5 करोड़ रुपये और इससे अधिक की शुद्ध लाभ वाली सभी कंपनी

बदलाव के बाद कंपनी अधिनियम, अनुसूची 7 में जिन महत्वकपूर्ण गतिविधियां शामिल किया गया है वो हैं :

क) निवारक स्वास्थ्य  देखभाल, स्वच्छता और स्वच्छ पेय जल उपलब्धिता को बढ़ावा देना।

ख) महिलाओं और अनाथों के लिए घर व होस्टल, वृद्धाश्रम, दैनिक देखभाल केन्द्र  और वरिष्ठक नागरिकों के लिए अन्य सुविधाएं स्थापित करना व सामाजिक व आर्थिक रूप से पिछड़े समूहों के लिए असमानता में कमी लाने के उपाय करना।

ग) पर्यावरण संतुलन, वनस्पति व प्राणी समूह की सुरक्षा, पशु कल्याण, कृषि वानिकी,प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण और मिट्टी, जल व वायु की गुणवत्ता  सुनिश्चित करना।

घ) आजीविका बढ़ाने वाली परियोजनाएं।

ङ) राष्ट्रीय विरासत, कला व ऐतिहासिक महत्व की इमारतों का संरक्षण व कलाकृतियों सहित संस्कृति की सुरक्षा, जन पुस्तवकालयों की स्थापना और परंपरागत कला व हस्त शिल्प का विकास व संवर्द्धन।

च) सशस्त्र बल के दिग्गाजों,युद्ध विधवाओं और इनके आश्रितों के लाभ के लिए कदम उठाना।

छ) ग्रामीण खेलकूद, राष्ट्री य मान्य्ता प्राप्त खेलों, पैरा-ओालंपिक खेलों व ओलंपिक खेलों के संवर्द्धन के लिए प्रशिक्षण।

ज) केन्द्र सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त प्रौद्योगिकी शिक्षण संस्थानों को अंशदान अथवा निधि योगदान देना।

झ) ग्रामीण विकास परियोजनाएं।

नियम के प्रभावी होने के बाद अब सीएसआर निभाने वाली कंपनियों को पहले की तरह  केवल अपने कर्मचारियों के लिए कल्याण की पहल भी कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व  (सीएसआर) के दायरे में नहीं आएगा।

एक महत्वपुर्ण बात ये हुई की व्यवसायिक घरानों द्वारा राजनीतिक दलों को मिलने वाला दान भी अब सीएसआर के दायरे से बाहर हो गया. अधिसूचना में  स्पष्ट रूप से निर्देशित है कि “सीधे या परोक्ष रूप से” कंपनियों द्वारा किसी भी राजनीतिक पार्टी को दिया गया कोई भी योगदान सीएसआर गतिविधियों नहीं होगा।

पिछले वर्ष सरकार ने राजनीतिक पार्टियों को धन उपलब्ध कराने के लिए कंपनियों को एक नई संरचना दिया था, जिसे ‘ चुनावी न्यास ’ कहा गया. इस ‘चुनावी न्यास’ के तहत पंजीकृत राजनीतिक पार्टियों को कंपनियां राजनीतिक धन दे सकती थी। ‘चुनावी ट्रस्ट’ संरचना के तहत राजनीतिक दलों दिए जाने वाले धन पर  कंपनियों को कुछ कर लाभ भी मिलता है। एक दर्जन से भी अधिक ब्यवसायिक धरानों इस तरह के ट्रस्टों बना रखा है, जिनमें अंबानी, टाटा, मित्तल, बिड़ला और वेदांत शामिल हैं। लेकिन देश में आम चुनावों से कुछ ही समय पहले इस अधिसूचना के आने से राजनीतिक पार्टियों को अब सीधे या परोक्ष रूप से धन नहीं मिल पाएगा।

हालांकि सामाजिक उत्थान के कार्यों के लिए धन की कमी नहीं रहेगी। जैसा कि दूरसंचार मंत्री कपिल सिब्बल हाल ही में कहा था की अनुमान के मुताबिक अगले वित्तीय वर्ष में कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व  के तहत कंपनियां लगभग 28000 करोड़ रु. का योगदान करेंगी। अगर इतना धन कॉरपोरेट सामाजिक दायित्वि के तहत आ गया और नए नियमों का सही ढंग से पालन हुआ तो निश्चित रुप से विकास कार्यो का दायरा बढ़ेगा, चैरिटी का माहोल बनेगा जिसका दूरगामी प्रभाव पड़ेगा।

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