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एनजीओ की मदद से स्वंय सहायता समुह की महिलाएं 'बी-फ्री' नाम से सेनेट्री पैड बना कर हो रहीं हैं स्वावलम्बी।

मधुबनी: मिथिला पेंटिंग के क्षेत्र में विश्वविख्यात मधुबनी अब सेनेट्री नैपकिन के उत्पादन के क्षेत्र में भी नई पहचान स्थापित करने जा रहा है। नाबार्ड के सहयोग से एसएचजी की महिलाएं 'बी-फ्री' नाम से सेनेट्री पैड का उत्पादन का विस्तार करते हुए तीन से चार हजार रुपये मासिक आमदनी कर रही हैं।

लोकहित रंगपीठ सेवा संस्थान द्वारा वर्ष 3 मार्च 2013 को राजनगर के सतघारा पंचायत में तत्कालीन डीडीसी व नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक ने सेनेट्री नैपकिन उत्पादन केंद्र का उद्धाटन किया था। संस्थान ने लोकहित मिथिला हस्त उत्पाद महिला विकास स्वावलंबी सहकारी समिति का गठन किया। जिसका लाभ मिथिला पेंटिंग से जुड़ी कलाकार उठा रही हैं।


समूह बैंक से जुड़कर प्राप्त धन से खरीदी गई आधुनिक मशीन से मैनुअल काम के बाद मशीन से गुणवत्तापूर्ण पैड का उत्पादन होता है।

'बी-फ्री' सेनेट्री नैपकिन का उत्पादन महिलाएं घर के कामकाज से बचे चार से पांच घंटे समय करती हैं। एक महिला एक घंटे में चालीस से पचास पीस पैड बना लेती है। जिससे अमूनन 150 से 200 रुपये की आय होती। स्कूली बच्चियों के बीच भी इन नैपकिन के वितरण की योजना है।

 

एनजीओ की मदद से स्वंय सहायता समुह की महिलाएं 'बी-फ्री' नाम से सेनेट्री पैड बना कर हो रहीं हैं स्वावलम्बी।

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