पहल

  • संयुक्त राष्ट्र में दिखाई जाएगी मानव तस्करी पर आधारित फिल्म 'लव सोनिया'
  • एनजीओ, ट्रस्ट और निजी संस्थानो के लिए निबंधन कार्यालय ने किया ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन और संशोधन करने की सुविधा की शुरुआत
  • एनजीओ को साथ मिलकर एसबीआई बैंक शुरु करेगी, SBI यूथ इंडिया फेलोशिप
  • करोड़ों का ऑफर छोड़, एनजीओ से मिले 2.04 करोड़ रुपए से डेढ़ साल पहले मुंबई में एक स्टार्टअप शुरू किया, इरादा अलीबाबा जैसा प्लैटफॉर्म बनाने का
  • एनजीओ अकाउंट और बैकिंग मैनेजमेंट पर एक्सिस बैंक ने कार्यशाला आयोजित किया, साथ हीं एक्सिस फांउडेशन के बारे में भी जानकारी दी ।

खबर लहरिया अख़बार के जरिये महिलाओं को मिला सम्मान- सुल्तान अहमद

समाज में महिलाओं का सम्मान और स्थान सुनिश्चित करना है तो उन्हें शिक्षित करना होगा, इसी सोच के साथ सामाजिक संस्था “ निरंतर” ने साक्षरता अभियान के तहत सोचा की महिलाओं को शिक्षित कर उन्हें पत्रकारिता की तकनीक सीखा कर पत्रकारिता के लिए प्रेरित किया जाए। इस सोच को हकीकत में बदलते हुए संस्था ने २००२ में चित्रकूट से बुन्देली भाषा में पहला अख़बार खबर लहेरिया निकाला। यह अखबार स्थानीय महिलाओं की भागिदारी सो निकाल गया।

बुन्देली भाषा की खबर लहरिया की सफलता को देखते हुए संस्था ने निश्चय किया की देश की वो स्थानीय भाषाएँ जो केवल बोली जाती हैं लेकिन लिखी नहीं जाती और अगर लोगों तो उसी भाषा में अख़बार पहूंचाया जाए तो उस समाज के विकास को तेजी से बढ़ाया जा सकता है। इसके पीछे एक सोच यह भी था कि लोगों को अपनी भाषा में बोलने-पढ़ने में काफी ख़ुशी मिलती है। संस्था द्वारा २०१० मैं बिहार के सीतामढ़ी से बज्जिका संस्करण , २०१२ मैं उत्तर प्रदेश से भोजपुरी संस्करण, २०१२ मैं ही लखनऊ , फैजाबाद और अंबेडकर नगर से अबधि संस्करण की शुरुआत हुई।. आज इन सभी भाषाओँ ४० से ज्यादा महिला पत्रकार समाज के उन अनसुने मुद्दे को अपनी अखबार के माध्यम से उठाती हैं जिन मुद्दों को देश के दुसरे मीडिया नहीं उठा पाते हैं।

                       


खबर लहरिया बज्जिका संस्करण की स्थानीय संपादक रीता देवी और लक्ष्मी शर्मा की माने तो, प्रशिक्षण के बाद जब वो फील्ड मैं अख़बार के लिए रिपोर्ट लाने के जाती थीं तो समाज के लोगों का सहयोग मिलने के वजाय़ ताना मिलता था। अधिकारी भी उन्हें अन्य प्रमुख अखवारों के पत्रकारों की तरह गंभीरता से नहीं मान्यता नहीं देते थे, कई बार तो यह कह कर भगा देते थे कि क्या ये गाँव की गंवार औरतें पत्रकिरता करेंगी। लेकिन बितते समय के साथ लोगों के वर्ताव और उनके काम के प्रति समाज का नजरिया बदला और अब सम्मान के साथ उन्हें जवाब विनम्रता से देते हैं। इनका कहना है की खबर लहेरिया ने उन्हें समाज मैं सम्मान दिलाया।

आठ पन्ने का बज्जिका भाषा में खबर लहरिया देश का पहला अख़बार है जो अपने पाठकों में काफी प्रसिद्ध है। लोगों को जब अपनी भाषा में अख़बार मिलता है तो उसे पढ़कर काफी गौरवान्वित महसूस करते हैं. लक्ष्मी शर्मा के मुताबिक खबर लहरिया साप्ताहिक हैं और इसकी कुल प्रति १००० हर हफ्ते छपती हैं , ख़बरों का चयन , संपादन , अखबार का डिजाईन, फोटो और टाइपिंग सारा कार्य इनके सभी रिपोर्टर और संपादक मंडल ही करते हैं। अखबार के प्रति का वितरण ख़बरों के संग्रह के दौरान ही करते हैं।

एक और पहल के तहत पाठक अब हर सप्ताह खबर लहरिया सीतामढ़ी संस्करण की मुख्य खबरों को बिहार मोबाइल वाणी पर भी सुन सकते हैं और अपनी प्रतिक्रिया भी दे सकते हैं। पाठक अगर अपने समुदाय या आस-पास की खबरें भी खबर लहरिया के पत्रकारों के साथ साझा कर सकते हैं। खबर लहरिया के संवाददाता उन खबरों की प्रमाणिकता की पुष्टि करने के बाद उसे प्रमुखता से छापेंगे।

खबर लहरिया सुनने के लिए बिहार मोबाइल वाणी के नि: शुल्क नम्बर 08800984861 पर कॉल किया जा सकता है।

 

खबर लहरिया अख़बार के जरिये महिलाओं को मिला सम्मान- सुल्तान अहमद
khabar laharia making a difference in life of rural women

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