पहल

  • इंफोसिस फाउंडेशन देगा सोशल इनोवेशन अवार्ड्स
  • संयुक्त राष्ट्र में दिखाई जाएगी मानव तस्करी पर आधारित फिल्म 'लव सोनिया'
  • एनजीओ, ट्रस्ट और निजी संस्थानो के लिए निबंधन कार्यालय ने किया ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन और संशोधन करने की सुविधा की शुरुआत
  • एनजीओ को साथ मिलकर एसबीआई बैंक शुरु करेगी, SBI यूथ इंडिया फेलोशिप
  • करोड़ों का ऑफर छोड़, एनजीओ से मिले 2.04 करोड़ रुपए से डेढ़ साल पहले मुंबई में एक स्टार्टअप शुरू किया, इरादा अलीबाबा जैसा प्लैटफॉर्म बनाने का

एनजीओ ‘चाइल्ड सर्वाइवल इंडिया’ की बाल विवाह के खिलाफ 'सफेद बिंदी' मुहिम।

नई दिल्ली: औरत के श्रृंगार में बिंदी का चलन वर्षों से है और इसी चलन का इस्तेमाल बाल विवाह की कुरीति के खिलाफ आवाज बुलंद करने के लिए एनजीओ चाइल्ड सर्वाइवल इंडिया ने किया है। बाल विवाह के खिलाफ जनमत को एकजुट करने के मकसद से इस एनजीओ ने हजारों सफेद बिंदियों से लैस एक कलात्मक कृति का अनावरण कर 'नो चाइल्ड ब्राइड्स' (कोई बाल दुल्हन नहीं) नाम की एक मुहिम शुरू की है।

 

इस कृति में कुल 39,000 बिंदियों से झारखंड की एक 15 साल की लड़की का चित्र बनाया गया है। चित्र बनाने के लिए 39,000 बिंदियों का इस्तेमाल इसलिए किया गया क्योंकि दुनियाभर में हर रोज करीब इतनी ही संख्या में बाल विवाह के मामले सामने आते हैं।

चाइल्ड सर्वाइवल इंडिया के प्रखर जैन ने बताया, शादीशुदा महिलाओं द्वारा लगाई जाने वाली लाल बिंदी प्यार और समृद्धि की प्रतीक है। यह भी माना जाता है कि बिंदियां महिलाओं को किसी अनहोनी से बचाती है। सफेद बिंदी लगाने का चलन है, पर अब भी ज्यादा महिलाएं सफेद बिंदी नहीं लगातीं। लिहाजा हमने सोचा कि सफेद बिंदी को बाल विवाह के खिलाफ एक प्रतीक के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।

जैन ने अपने दोस्तों- सुमित और निखिल के साथ झारखंड और हरियाणा का दौरा किया और बाल विवाह का शिकार हुई दुल्हनों पर शोध किया एवं उनकी तस्वीरें लीं। तकरीबन छह महीने के काम के बाद उन्होंने ‘चाइल्ड सर्वाइवल इंडिया’ नाम का एक एनजीओ शुरू किया जो भारत में बाल विवाह में कमी लाने की दिशा में काम करता है।

(भाषा)

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