मौलाना आजाद फाउंडेशन के सचिव एम.डब्ल्यू अंसारी को पद से हटाने के मामले में अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री रहमान खान पर सवाल

केंद्र सरकार ने मौलाना आजाद फाउंडेशन के सचिव एम.डब्ल्यू अंसारी को पिछले 1 मई को पदमुक्त करते हुए उन्हें अपने पैरेंट कैडर में वापस जाने का फरमान जारी कर दिया। एमडब्ल्यू अंसारी डीजीपी रैंक के अधिकारी हैं। कहा जा रहा हैं कि अंसारी अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री के रहमान खान से फंड वितरण एवं कुछ एनजीओ पर कार्रवाई को लेकर हां मतभेद होने के कारण अंसारी को हटाया गया है।

मौलाना आजाद फाउंडेशन केंद्रीय अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रालय के अधीन काम करता है, यह फाउंडेशन अल्पसंख्यक छात्रों को स्कालरशिप और उनकी पढ़ाई व रोजगार पर सैकड़ों करोड़ रुपये का फंड वितरित करता है के साथ साथ अल्पसंख्यकों के कल्याण के लिए एनजीओ को भी फंड के रुप में सहायता देता है।


कई सालों से  निष्क्रिय संस्था के रूप में जाने जा रहे मौलाना आजाद एजुकेशन फाउंडेशन को एम. डब्लू अंसारी ने सचिव बनने के बाद नयी जान फूंकी थी। 35 हजार छात्रों को स्कॉलरशिप देकर एक रिकार्ड बना और कई एनजीओ को ब्लैकलिस्टेड कर दिया जो भ्रष्टाचार में लिप्त थे और फाउंडेशन से ग्रांट हासिल कर फर्जीवाड़ा कर रहे थे।


अंसारी के हटाये जाने का विरोध शुरू हो गया है, फोरम फॉर मुस्लिम स्टडीज ऐंड एनालाइसिस ने यूपीए सरकार की आलोचना करते हुए कहा है कि अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री के रहमान खान ईमानदार अधिकारियों को काम करने नहीं देना चाहते।


अंग्रेजी अखबार डीएनए ने अपने सूत्र के हवाले से लिखा है कि गर्वनिंग काउंसिल की बैठक में अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री के रहमान खान और फाउंडेशन के सचिव अंसारी के बीच कुछ एनजीओ को ब्लैकलिस्टेड किये जाने पर तकरार पैदा हो गया था। बताया जाता है कि रहमान खान एक खास एनजीओ को ब्लैकलिस्ट किये जाने पर खासे नाराज थे और वह चाहते थे कि उसे ग्रांट जारी रखा जाये, पर अंसारी ने उस एनजीओ के आचरण पर प्रश्न चिंह लगाते हुए उसे ग्रांट देने से इनकार कर दिया था।


हालांकि इस संबंध में रहमान खान की प्रतिक्रिया अभी तक सामने नहीं आयी है लेकिन उनके दफ्तर के एक अधिकारी ने डीएनए को बताया था कि सचिव एमडब्लू अंसारी ने फाउंडेशन के भवन निर्माण में 15 प्रतिशत अतिरिक्त राशि खर्च की थी.

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