मुनाफा अरबों का मगर सीएसआर पर खर्च में कंजूसी, देश की दस प्रमुख पीएसयू में से पांच ने इस मद में एक पैसा भी खर्च नहीं किया है।


नई दिल्ली।  नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने लोकसभा में पेश एक ऑडिट रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि अरबों रुपये मुनाफा कमाने वाले सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (पीएसयू) कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी पर खर्च करने में कंजूसी कर रहे हैं। हाल यह है कि केंद्र के 10 प्रमुख पीएसयू में से पांच ने इस मद में एक पैसा भी खर्च नहीं किया है। 

 

केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों संबंधी कैग रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2012-13 में ईस्टर्न कोलफील्ड्स को 962.13 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ, लेकिन कंपनी ने सीएसआर पर कोई व्यय नहीं किया। नियमानुसार ईस्टर्न कोलफील्ड्स को कम से कम 4.81 करोड़ रुपये सीएसआर पर खर्च करने थे।


इसी तरह भारत कोकिंग कोल लिमिटेड को 822 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ। उसके लिए भी सीएसआर पर कम से कम 4.11 करोड़ रुपये खर्च करने जरूरी थे, लेकिन कंपनी ने एक पैसा भी व्यय नहीं किया। एंट्रिक्स कॉरपोरेशन लिमिटेड को 170.98 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हुआ। कंपनी को 3.40 करोड़ रुपये सीएसआर पर खर्च करने थे, लेकिन उसने भी एक भी रुपया खर्च नहीं किया। रेलटेल कॉरपोरेशन और चेन्नई मेट्रो रेल ने भी क्रमशः 85.85 करोड़ रुपये और 71.04 करोड़ रुपये शुद्ध लाभ अर्जित किया। इन दोनों कंपनियों ने भी एक पैसा सीएसआर पर खर्च नहीं किया।

सरकार के दिशानिर्देशों के मुताबिक, 100 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा कमाने वाली कंपनियों को 3-5 प्रतिशत और 100 से 500 करोड़ वाली को 2-3 प्रतिशत (कम से कम 3 करोड़ रुपये) सीएसआर पर खर्च करना अनिवार्य है। पांच सौ करोड़ से अधिक शुद्ध मुनाफे वाले पीएसयू को 0.5 से 2 प्रतिशत के बीच धनराशि इस मद में खर्च करना आवश्यक है।


कैग की रिपोर्ट में कहा गया है कि 10 करोड़ रुपये से अधिक शुद्ध लाभ कमाने वाले केंद्र के 103 पीएसयू में से 41 ने सीएसआर के संबंध में सार्वजनिक उपक्रम विभाग के दिशानिर्देशों का पालन नहीं किया। कैग ने सार्वजनिक उपक्रमों के संयुक्त उद्यम तथा विदेशी इकाइयों पर भी सवाल उठाए हैं।

कैग का कहना है कि संयुक्त उद्यमों और विदेशी इकाइयों की निगरानी उसके दायरे में नहीं है। इसलिए इन पर संसद की निगरानी नहीं है। कैग ने इस संबंध में ओएनजीसी विदेश का उदाहरण दिया है। इस कंपनी ने मार्च 2009 तक 48,382 करोड़ रुपये संयुक्त उद्यम और विदेश में इकाई के जरिये निवेश किया है।

(सभार – नई दुनियां)

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