सहकारिता दुनिया को आर्थिक मंदी से निकाल सकती है: चार्ल्स गोल्ड

नई दिल्ली। अंतर्राष्ट्रीय सहकारी संघ (आईसीए )के महानिदेशक चार्ल्स गोल्ड ने कहा है कि आर्थिक मंदी के चपेट से उबरने के लिए दुनिया को सहकारिता का सहारा लेना चाहिए। उन्होने बताया कि इसके लिए मौजूदा दशक में सहकारी संस्थाओं को लोकप्रिय बनाने के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक दूरदर्शी ब्लू-प्रिंट तैयार किया गया है।

आईसीए महानिदेशक चार्ल्स गोल्ड हाज खास स्थित एनसीयूआई सभागार में 17 वां बैकुंठभाई मेहता स्मृति व्याख्यानमाला में अपना व्याख्यान देने के लिए खास तौर पर लंदन से आए थे। उन्होंने भारतीय सहकारिता आंदोलन के पुरोधाओं की ओर से दिखाए गए रास्ते की सराहना की और कहा कि सहकारिता में मानवीय कल्याण की भावना है। इसकी पहचान भारत में मिली है।


गोल्ड ने सहकारी संस्थाओं को अन्य मॉडल की तुलना में अलग पहचान पाने का प्रयास करने पर बल दिया। इसके लिए उन्होंने सहकारी संस्थाओं को सशक्त वैधानिक संरचना बनाने और विश्वसनीय वित्तीय पूंजी आधार कायम करने की जरूरत पर बल दिया।
उन्होने भारतीय सहकारी संस्थाओं की उपलब्धि का जिक्र करते हुए बताया कि विश्व सहकारी मानिटर 2013 के अनुसार इफको विश्व की सबसे बड़ी सहकारी संस्था है। यह आंकलन देश की प्रति व्यक्ति जी़डीपी मापदंड के अनुसार है।

बैकुंठभाई मेहता स्मृति व्याख्यानमाला के अध्यक्षीय भाषण में भारतीय ऱाष्ट्रीय सहकारी संघ के अध्यक्ष डॉ. चंद्रपॉल सिंह यादव ने नई सरकार से सहकारिता पर ध्यान देने की गुजारिश की। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार की बजटों में सहकारिताओं को नजरअंदाज किया जाता रहा है। नई सरकार से उम्मीद है कि आने वाले बजट में सहकारी संस्थाओं को देश की योजना निर्माण में लगाने का काम किया जाएगा। उन्होंने सहकारी संस्थाओं को आयकर से मुक्त करने का फैसला करना चाहिए।

 

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