कागजी शौचालय बनाने वाले ग्यारह घोटालेबाज एनजीओ हुए ब्लैक लिस्ट।

बरेली: इंटीग्रेटेड लो कास्ट सेनेटरी योजना के तहत कागजी शौचालय बनाने वाले ग्यारह स्वंयसेवी संगठनों और अधिकारियों पर शिकंजा कसने लगा है। पुलिस उनकी गिरफ्तारी में जुटी है तो नगरीय विकास अभिकरण ने घोटाले की रकम वापस लौटाने के लिए आरोपियों के खिलाफ आरसी जारी कर दी है। कार्रवाई के बाद आरोपी एनजीओ ब्लैक लिस्ट कर दिए गए हैं।

इंटीग्रेटेड लो कास्ट सेनेटरी (आइएसीएस) योजना के तहत वर्ष 2008 से 2011 के बीच नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायत क्षेत्रों में 1283 शौचालय बनाए जाने को करीब सवा करोड़ रुपया जारी किया गया। लेकिन अफसरों की मिली भगत से ग्यारह स्वंयसेवी संगठनों ने नौ हजार रुपये की लागत से बनने वाले यह शौंचालय कागजों पर बने हुए दिखा दिए और पैसा डकार गए।

फर्जीवाड़े की शिकायत मिलते ही पुलिस ने लखनऊ के हरिसेवा संस्थान, रामपुर के पीपल सेवा संस्थान, बरेली की राइजिंग यूथ एजुकेशनल सोसाइटी और अखिल भारतीय पर्यावरण सेवा समिति समेत ग्यारह स्वंयसेवी संगठनों और तत्कालीन परियोजना अधिकारी एमएल कन्नौजिया और सहायक परियोजना अधिकारी मोहम्मद हारुन के खिलाफ धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी। जांच में आरोप साबित होने आरोपियों की गिरफ्तारी का आदेश जारी कर दिया गया है। आरोपियों को नौ फीसद का ब्याज के साथ रकम की वापसी करनी होगी।

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