मिड डे मील घोटाले में पूर्व जिलाधिकारी दिनेश चंद्र शुक्ल को जेल।

मैनपुरी: चार साल के दौरान हुए मिड डे मील घोटाले में पूर्व जिलाधिकारी दिनेश चंद्र शुक्ल को जेल भेज दिया गया। मिड डे मील में वर्ष 2006 से लेकर 2010 तक करोड़ों रुपये का घोटाला अफसरों की मिलीभगत के चलते हुआ था। वर्ष 2010 में तत्कालीन जिलाधिकारी रणवीर प्रसाद ने जांच कराई, तो मामले से पर्दा हटा, उन्होंने हीं सीबीआइ जांच कराने की संस्तुति की थी। जांच के बाद सीबीआइ ने दो पूर्व जिलाधिकारी, दो सीडीओ और एक बीएसए पर चार्जशीट दाखिल की थी। इसी मामले में तत्कालीन जिलाधिकारी दिनेश चंद्र शुक्ला को सीबीआइ के सामने सरेंडर करने पर जेल भेजा गया।

क्या था मामला।


गाजियाबाद की सर्च संस्था को जिले के लगभग 2100 विद्यालयों में मिड डे मील बनाने का ठेका दिया गया था। संस्था ने बच्चों को खाने के नाम पर जमकर फर्जीवाड़ा किया था। जांच में खुलासा हुआ कि रविवार और अन्य सार्वजनिक अवकाश में भी स्कूल में मिड डे मील बनना दिखाया गया। गणतंत्र दिवस की छुट्टी में भी मिड डे मील बना। होली और दीपावली पर जहां दो से तीन दिन की छुंट्टी स्कूलों में होती है, इन दिनों में भी बच्चों को मिड डे मील देना दर्शाया गया। ठेका कंपनी की लॉगबुक में इसके सबूत भी मिले।

खाया 30 बच्चों ने और बिल बनाया 240 बच्चों का।

सीबीआइ के हाथ लगे दस्तावेजों के मुताबिक ऐसा कई प्राथमिक विद्यालय मिले जहां असली छात्र रजिस्टर में मात्र 30 बच्चे ही पंजीकृत हैं। जबकि 240 बच्चों की छात्र संख्या दिखाकर मिड डे मील की धनराशि हड़पी गई है।

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मिड डे मील घोटाले के आरोपी ने विशेष सीबीआई कोर्ट में पहुंचकर सरेंडर किया।

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