लाखों की नौकरी छोड़, गरीबों के पेट की आग बुझाने लगा वो...

वेसे तो आम इंसान येन केन प्रकार से धन कुबेर बनने की जुगत में दिन रात एक किए रहता है, लेकिन दुनिया में कुछ लोग भी हैं जिन्हें गरीबों की भूख विचलित करती है, और वो फिर उस गरीब की भूख को मिटाने के लिए अपने सुख की कुर्वानी दे देते हैं। नारायण कृष्णन दुनिया के उन्हीं चंद लोगों में से एक हैं जिनके जीवन का लक्ष्य गरीबों का पेट भरना है।

पेशे से एक शेफ हैं नारायण और एक फाइव स्टार के लिए काम करते हैं। उन्हें विदेशों में एक नौकरी का ऑफर मिलने के बाद वहां जाने से पहले अपने घर गए, लेकिन यहीं पर उनके जीवन का मकसद भी बदल गया। एक भूखे बुजुर्ग की विवशता देख उन्हें बेहद दुख पहुंचा। उन्होंने बुजुर्ग को खाना खिलाना शुरू किया और यहीं से सोच लिया कि मैं अपने जीवन में यही काम करूंगा। उन्होंने अपनी लाखों रूपए की नौकरी सिर्फ गरीबों का पेट भरने के मकसद से छोड़ दी थी। मदुरई शहर के मंदिर के पास की पुल के नीचे बैठे व्यक्ति की दयनीय स्थिति को देख उन्होंने नए मिशन की ओर कदम बढ़ाने का फैसला किया। 

गरीबों कि मदद के लिए 2003 में नारायण ने "अक्षया ट्रस्ट" नाम का एनजीओ शुरू किया। हर दिन वह कम से कम 400 लोगों का पेट भरते हैं। गरीबों का पेट भरने के लिए प्रति दिन 327 डॉलर की लागत लगती है और डोनेशंस से मिलने वाली राशि की मदद से पूरा महीने भूखों का पेट भरने के लिए पूरा पैसा नहीं जमा हो पाता है। इसके लिए कृष्णन अपने घर का किराया भी इन गरीबों का पेट भरने के लिए खर्च करते हैं। कृष्णन अपने कुछ सहकर्मियों के साथ अक्षया के रसोई घर में ही सोते भी हैं। एनजीओ की स्थापना के लिए उन्होंने 2002 में अपनी जमा पूंजी भी लगा दी थी। नारायण के काम को देखते हुए 2010 में सीएनएन ने उन्हें टॉप टेन हीरोज ऑफ द वर्ल़्ड के खिताब से सम्मानित किया।

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