जानिए क्या है जुवेनाइल जस्टिस बिल

देश भर में जुवेनाइल जस्टिस बिल को लेकर हो रहे चर्चे के बीच  सोशल वर्करों एवं समाज विज्ञान के छात्रों के लिए यह जानना जरुरी है कि क्या  है जुवेनाइल जस्टिस बिल और इस बिल से केसे कसेगा नाबालिग अपराधियों पर शिकंजा ।

गैंगरेप पीड़िता निर्भया के नाबालिग दोषी को रिहा करने के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट के इंकार के बाद न सिर्फ सवाल उठ रहे हैं बल्कि कानून में बदलाव के लिए लोगों का आक्रोश भी सड़कों पर देखने को मिल रहा है. तमाम क्षेत्र के लोग सवेदित हैं क्या कानुन का लाभ उठाते हुए घृनित और गंभीर अपराध करने वाला नवालिग को इतनी कम सजा क्यों।  एक तरफ कोर्ट ने साफ कर दिया है कि वो कानून से आगे जाकर कोई फैसला नहीं ले सकती है और कानून को बदलने का जिम्मा सरकार पर छोड़ दिया है.  ऐसे में सरकार पर जुवेनाइल जस्टिस बिल को पास करने का दवाब बढ़ गया है। जहां लोकसभा में पारित हो चुका ये बिल मंगलवार को चर्चा के बाद उच्च सदन राज्यसभा में भी पास हो सकता है।  उच्च सदन राज्यसभा में इस बिल के पास होने से नाबालिग अपराधियों पर कठोर कानून के तहत शिकंजा कसा जाएगा और उनमें जुर्म करने को लेकर खौफ होगा। कठोर कानुन के तहत सजा के डर से अपराधी प्रवृति वालों पर लगाम लग सकेगा ।

वर्तमान कानून के तहत 18 साल या उससे कम्र का कोई भी अपराधी कानून की नजर में नाबालिग होता है। वहीं इंडियन पैनल कोड कहता है कि 7 साल से कम उम्र के किसी भी बच्चे पर आपराधिक मामला दर्ज नहीं किया जा सकता।

देश में नवालिगों द्वारा किए जा रहे अपराधों में बढ़ोतरी खासकर संगीन जुर्म में नवालिगों की संलिप्तता को देखते हुए देशभर में लंबी चली बहस के बाद इस बात की मांग उठी कि जुवेनाइल अपराधियों की उम्र 18 से कम करके 16 की जाए। एनसीआरबी का डेटा यह बताने के लिए काफी था कि 2003 से 2013 के बीच ऐसे अपराध में इजाफा हुआ है और इस दौरान 16 से 18 साल के बीच के अपराधियों की संख्या 54 फीसदी से बढ़कर 66 फीसदी हो गई। जो नए जुवेनाइल जस्टिस बिल है उसमें प्रावधान है कि रेप और हत्या जैसे जघन्य अपराध करने वाले 16-18 साल के अपराधियों पर वयस्कों की तरह मामला चलाया जाए। ऐसा पाया गया कि जुवेनाइल जस्टिस कानून 2000 में कुछ प्रक्रियागत और कार्यान्वयन के लिहाज से खामियां थीं।  नए बिल में क्या हैं प्रावधानः

·        जुवेनाइल जस्टिस बिल 2000 को बदलकर जो नए बिल को लाया जाएगा उसमें प्रावधान है कि रेप और हत्या जैसे जघन्य अपराधों में 16-18 साल के अपराधियों को वयस्क माना जाएगा और उनपर वयस्कों की तरह ही केस चलेगा।

· रेप और हत्या जैसे जघन्य अपराध करने वाले 16-18 साल के किसी भी अपराधी पर केस तभी चलाया जाएगा जब वो 21 साल का हो जाएगा।

· बिल में देश के हर जिले में जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड और चाइल्ड वेलफेयर कमिटी बनाए जाने का प्रावधान है।

· जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के पास इस बात का फैसला करने का अधिकार होगा कि नाबालिग अपराधी को बाल सुधार गृह भेजा जाए या उसपर वयस्कों की तरह केस चलाया जाए।

· बच्चों के साथ दरिंदगी करने, बच्चों को ड्रग्स देने या बच्चों को अगवा करने/बेचने के अपराध में सजा वही रहेगी, जो पुराने बिल में है।

हांलांकि कानून के कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि जघन्य अपराध करने वाले नाबालिग अपराधियों पर वयस्कों की तरह केस चलाने से धारा 14 (समानता का अधिकार) और धारा 21 (कानून सबके लिए बराबर है) का उल्लंघन होता है। उघर नाबालिगों को वयस्कों की तरह सजा देने पर समाज में अलग-अलग राय है।  

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