एनजीओ मैनेजमेंट और समाज कार्य में कॅरियर

एनजीओ में काम करते हैं ! कुछ वर्ष पहले ऐसा कहने पर लोगों को लगता था कि, अच्छा ! समाज सेवक है, झोला लटकाकर गरीब-मलिन बस्ती में धूम- धूम कर लोगों के कल्याण व विकास लिए काम करता होगा। पैसे वेसे क्या कमाता होगा, जैसे तैसे जीवन यापन करता होगा । लेकिन बदलते वक्त के साथ लोगों में एनजीओ के बारे समझ और जानकारी बढ़ी, और अब स्थिति यह है कि इस क्षेत्र में भारी तादाद में युवा करियर बनाने के उत्सुक हैं। देश- विदेश में नौकरी के अवसर के साथ उच्च मानदेय, सम्मान और नाम देने वाला क्षेत्र हो गया है। आत्म संतुष्टि, समाज के लिए कुछ करने का अवसर देने वाला यह क्षेत्र अब चैरिटेबल होने के साथ-साथ प्रोफेशनल एप्रोच के साथ मैनेजमेन्ट स्किल, विविध विषयों की समझ रखने वाले युवाओं के लिए भरपूर अवसर के दरवाजे खोले बैठा है। 

एनजीओ अंग्रेजी के शब्दों नॉन गवर्नमेंटल ऑर्गेनाइजेशन (Non Governmental Organization- NGO) का संक्षिप्त रुप है। एनजीओ को हिन्दी में गैर सरकारी संगठन या संस्था भी कहा जाता है ।  आज जब एनजीओ अर्थात गैर सरकारी संस्था का मैनेजमेंट एक बहुत हीं महत्वपूर्ण प्रेफेशन हो गया है। एनजीओ द्वारा दुनियाभर में हर वर्ष करोड़ों लोगों को सुविधाएँ एवं सेवाएँ पहुँचाई जा रही हैं। इसमें काम का दायरा विशाल है। वैश्विक अर्थव्यवस्था में एनजीओ को एक महत्वपुर्ण सेक्टर के रुप में स्थान मिला हुआ है। और इस तरह से  एनजीओ का कार्यक्षेत्र बियांड द बॉंऊंडरी, वैश्विक स्तर पर फैला है तो इसी बात में कोइ शक नहीं है कि  एनजीओ मैनेजमेंट में के क्षेत्र में रोजगार की असीम संभावनाएं हैं।

एक आँकड़े के अनुसार वर्तमान में देश में लगभग 20 लाख से अधिक एनजीओ सोसायटीज रजिस्ट्रेशन एक्ट, ट्रस्ट एक्ट आदि में पंजीकृत हैं। इनमें 15 हजार से अधिक एक्टिव एनजीओ हैं, जो कई क्षेत्रों में छोटा-बड़ा योगदान दे रहें हैं। माना जाता है कि जिसमें से 53 प्रतिशत ग्रामीण क्षेत्रों में, 17 प्रतिशत ह्यूमन रिसोर्स डेवलपमेंट के क्षेत्र में, 10 प्रतिशत सामाजिक न्याय एवं सशक्तिकरण और 10 प्रतिशत अन्य सेक्टर में कार्यरत हैं।

इन पहलुओं पर ध्यान दें तो इससे यह साबित होता है कि एनजीओ में अच्छी सेलरी के साथ रोजगार के बड़े अवसर हैं । ऐसे लोगो जो समाज सेवा में रुची रखते हों, देश-दुनिया के पटल पर नाम कमाना चाहते हों, समाज मे प्रतिष्ठा प्राप्त करना चाहतें हों तो उनके लिए ये एनजीओ से बेहतर विकल्प कुछ और नही हो सकता ।

ध्यान देने वाली बात यह है कि एनजीओ एक स्वयंसेवी संगठन के रुप में कार्य करता है। एनजीओ किसी विशेष क्षेत्र में भी काम कर सकता है या फिर एक साथ कई क्षेत्रों में भी काम कर सकता है। एनजीओ के काम का दायरा असीमित है । एनजीओ एन्वायरमेंन्ट, ग्रामीण विकास, जल संरक्षण, महिला सशक्तिकरण, शिक्षा स्तर, चिकित्सा बाल कल्याण, पुनर्वास, आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों के साथ रोजगार उत्पन्न करने, प्रशिक्षण देने, कानूनी सहायता देने, एडवोकेसी करने, विकास संवाद करने, राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय स्तर पर बात रखने, सामाजिक आंदोलन और परिवर्तन करने में अहम भूमिका निभाता है ।

एनजीओ के काम करने का क्षेत्र जितना विशाल है उतना ही विशाल समूह है एनजीओ को धन और फंड देने वाली संस्थाओं का । एनजीओ को सरकारी, गैर सरकारी, कॉरपोरेट जगत एवं आम लोगों से धन एवं अनुदान की बड़ी रकम मिलती है। सरकार भी कई कल्याणकारी परियोजनाओं को एनजीओ के साथ मिलकर लागू करती है। एनजीओ के साथ भागिदारी के लिए विभाग बने होते हैं। इस तरह से एनजीओ मेनेजमेंट का  ज्ञान रखने वालों के लिए सरकारी क्षेत्र में भी काम करने का बड़ा अवसर मिलता है। अनुभवी लोगों को सरकारी संस्थान सलाहकार के रुप में भी नियुक्त करती है। अब तो एनजीओ मेनेंजमेंट का स्किल रखने वालो लोगों को कॉरपोरेट जगत में नौकरीयां मिलने लगी है। कॉरपोरेट सोशल रिस्पान्सबिलिटी के तहत काम करने के लिए कॉरपोरेट जगत को भी एनजीओ क्षेत्र के अनुभवी और प्रशिक्षित लोगों को बड़े स्तर पर जरुरत पड़ रही है।  

काम करने के दायरे के आधार पर एनजीओ के नेशनल और इंटरनेशनल रुप में पहचान मिलता है। इंटरनेशनल एनजीओ के रुप में  यूनेस्को, वर्ल्ड बैंक, नाटो, यूनीसेफ, रेडक्रॉस, ग्रीनपीस, एमनेस्टी इंटरनेशनल आदि को जाना जाता है । नेशनल लेवल पर बचपन बचाओ आंदोलन, क्राई, प्रयास, प्रदान जैसे कई संस्थाएं हैं।

प्रशिक्षित लोगों को एनजीओ में निदेशक, प्रबंधक, कोर्डनेटर, रिसर्चर, कम्यूनिटी सर्विस प्रोवाइडर, सोशल सर्विस प्रोवाइडर, आदि जैसे पदों पर नियुक्तियाँ होती हैं। इन पदों पर अनुभव के आधार पर सेलरी एवं सुविधाएं मिलती हैं।

एनजीओ मेनेजमेंट के लिए जो मुख्य जानकारी के विषय और क्षेत्र हैं, वो हैं एनजीओ क्या है ? कैसे बनता है ? इसे कौन ओर कैसे चलाया जा सकता है ? किस प्रकार के कानुन हैं ? इसमें वित्तीय पहलू क्या है ? सीएसआर क्या है ?, प्रमुख सामाजिक मुद्दे एवं समस्याएं, आर्थिक नीति, सरकारी परियोजनाएं एवं फंडिग, प्रोपोजल ड्राफ्टिंग, डेवेलेपमेंट कम्यूनेकेशन, रिसर्च स्टडी आदि-आदि। एनजीओ मैनेजमेंट में प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए कई स्तर के पुर्णकालिक एवं अंशकालिक कोर्स हैं, जिसे रेगूलर एवं पत्राचार द्वारा किया जा सकता है।

कोर्सेज (Social Work Courses)
•    स्नातकोत्तर (MSW- Master of Social Work, MA in Social Work)
•    स्नातक (BSW- Bachelor of Social Work, BA in Social Work)
•    डीप्लोमा (Diploma in NGO Management)
•    सर्टिफिकेट (Certificate Course in NGO Management)

देश भर में कई सरकारी और प्राइवेट संस्थांनों में इन कोर्सोज को पढाया जा रहा है। इन कोर्सोज को संचालित करने वाले कई प्रमुख एवं प्रतिष्ठित संस्थान है जहां से ये कोर्स किया जा सकता है। प्रमुख शिक्षण संस्थान इस प्रकार हैं -

1.    समाज कार्य विभाग, दिल्ली  विश्वविद्यालय, दिल्ली.
2.    समाज कार्य विभाग, जामिया मिलिया इस्लामिया, दिल्ली.
3.    टाटा इंस्टीच्यूट ऑफ सोशल साईंस, मुम्बई.
4.    समाज कार्य विभाग, कुरुक्षेत्र  विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र, हरियाणा.
5.    उदयपुर स्कूल ऑफ सोशल वर्क, राजस्थान विद्यापीठ, उदयपुर।
6.    डिपार्टमेंट ऑफ सोशल वर्क, पंजाब विश्वविद्यालय, पटियाला।
7.    डिपार्टमेंट ऑफ सोशल वर्क, काशी विद्यापीठ, वाराणसी।
8.    डिपार्टमेंट ऑफ सोशल वर्क लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ।
9.    इग्नू (पत्राचार माध्यम)

ऑनलाईन जानकारी हेतु भी कई वेवसाइट हैं जहां से आप एनजीओ से संबंधित जानकारी प्राप्त कर सकते है। अंग्रेजी माध्यम में तो बसाईट की संख्या ज्यादा है, और हिन्दी में अभी कम है। हिन्दी में उपलब्ध वेवबसाईटों में “ द एनजी टाइम्स डॉट कॉम ” एक प्रमुख साईट है जहां से आप महत्वपुर्ण जानकारी ले सकते हैं। इस प्रकार आप समाज के प्रति दायित्व का निर्वाह करते हुए गरीबों एंव जरुरतमंद के कल्याण के साथ-साथ राष्ट्रीय-अतंराष्ट्रीय मुद्दों पर काम करने की इच्छा रखते हैं तो आप एनजीओ मेनेजमेंट का कोर्स कर अपनी इस इच्छा को पूरी कर सकते हैं।

                                                                                                                             लेखक - विकास सिंह 

 

Tags:  एनजीओ । मैनेजमेंट । समाज कार्य । कॅरियर । NGO । CSR ।

(c) The NGO Times 

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