होम मिनिस्ट्री द्वारा पीआरएस की विदेशी फंडिंग पर रोक, सांसदों की मदद करती है यह रिसर्च संस्था।

होम मिनिस्ट्री द्वारा पीआरएस की विदेशी फंडिंग पर रोक, सांसदों की मदद करती है यह रिसर्च संस्था।

सांसदों को मदद देने वाली रिसर्च एजेंसी पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च (पीआरएस), होम मिनिस्ट्री की जांच के दायरे में रही है और मिनिस्ट्री ने पीआरएस की विदेशी फंडिंग रोक दी थी। जिस संस्था ने अपनी साख सांसदों की मदद करके बनाई थी, अब पता चला है कि सरकार को शक है कि जो रिसर्च एजेंसी सांसदों के साथ काम करती है, उसमें विदेशी फंडिंग के चलते मामला 'लॉबीइंग' की ओर बढ़ सकता है। पीआरएस ने भी फॉरन फंडिंग पर बैन की पुष्टि की है, संस्था के अनुसार सरकार ने पीआरएस को इसकी कोई वजह नहीं बताई है। उन्हें मिनिस्ट्री से अंडर-सेक्रेटरी द्वारा एक लाइनका लेटर मिला है कि विदेशी फंडिंग की रिक्वेस्ट 'पब्लिक इंटरेस्ट' मेंखारिज की जा रही है।



होम मिनिस्ट्री ने दो बार पीआरएस की विदेशी फंडिंग की मांग खारिज की है। पीआरएस ने फोर्ड फाउंडेशन और इंटरनैशनल डिवेलपमेंट रिसर्च सेंटर ऑफ कनाडा (आईडीआरसी) जैसे संस्थानों से फंडिंग की इजाजत सरकार से मांगी थी। इस मामले में गृह मंत्रालय के राज्य मंत्री कहना है कि, 'यह ठीक नहीं है कि पार्लियामेंट्री रिसर्च में मदद के लिए हमारे सांसद किसी एनजीओ के जरिए विदेशी फंड स्वीकार करें।'


होम मिनिस्ट्री के एक सीनियर ऑफिशल के अनुसार पीआरएस के खिलाफ कोई आरोप नहीं लगे हैं। दरअसल वह जो काम करती है, वह नेताओं से जुड़ा हुआ है। पीआरएस का मकसद 'बेहतर इंफर्मेशन, ज्यादा पारदर्शिता और भागीदारी बढ़ाकर लेजिस्लेटिव प्रॉसेस को मजबूत करना है।' वह सांसदों को लेजिस्लेटिव असिस्टेंट्स देती है। इन असिस्टेंट्स को फेलोशिप के जरिए चुना जाता है, जिसे एलएएमपी या लैंप (लेजिस्लेटिव असिस्टेंट्स टु एमपी) कहते हैं। पीआरएस कीरिसर्च रिपोर्ट्स सभी सांसदों को भेजी जाती हैं, हाल में खत्म हुई लोकसभा के करीब 400 मेंबर्स को ये रिपोर्ट्स मिल रही थीं।

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