पढ़े-लिखे लोग क्रांति करते-करते बड़ी-बड़ी नौकरी करने लगते हैं

 

Ashutosh Singh- पढ़े-लिखे लोग क्रांति करते-करते बड़ी-बड़ी नौकरी करने लगते हैं। उम्र अधिक हो गई,तो एनजीओ बना लेते हैं या किसी फंडिंग एजेंसी में चले जाते हैं। इस तरह पावर में रहते हैं। साधारण कार्यकर्ताओं के लिए विकल्प बहुत कम होते हैं। उन्हें मजबूरी में किसी राजनीतिक दल की शरण लेना पड़ता है। इन कार्यकर्ताओं का एक बड़ा भाग एन.जी.ओ में बहुत मामूली रूपये पर काम करते हैं। आला लोग हवाई सफर करते हैं, विदेश भ्रमण, नहीं सेमिनार आदि में जाते रहते हैं। लेकिन वहाँ जो कुछ काम हो पाता है, वह इन्हीं कार्यकर्ताओं के कारण ही होता है। हमारी निगाह समाज--समाज की गुहार लगाने वाली स्वशासी संस्थाओँ की ओर नहीं जाती।


                                            सोशल एक्टिविस्ट आशुतोष सिंह के फेसबुक वॉल से.

 

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