मिड डे मील योजना के लिए इंफोसिस और टाटा ग्रुप मिलकर 200 करोड़ रुपये की मदद एनजीओ अक्षय पात्र को करेगें ।

Mid Day Meal 
 
 
 
 
 
 
 
 
मिड डे मिल के मॉडल योजना के लिए अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा से प्रशंसा बटोर चुकी एनजीओ अक्षय पात्रा  को अब इंफोसिस और टाटा ग्रुप ने मिलकर 200 करोड़ रुपये की मदद करगी। रकम का उपयोग अक्षय पात्र के कामकाज का दायरा बढ़ाने और हॉट कुक्ड फूड टेक्नॉलॉजी से इसे लैस करने में किया जाएगा ताकि खाना जल्द बन सके, उसकी लागत घटे और गुणवत्ता भी बेहतर हो सके।  

इंफोसिस की चैरिटेबल संस्था, द इंफोसिस फाउंडेशन 127 करोड़ रुपये देगा, जिससे तीन आधुनिक किचेन बनाए जाएंगे इसके अलावा वह 20 करोड़ रुपये और देगा। जमशेदजी टाटा ट्रस्ट 55 करोड़ रुपये देगा, जिससे एनजीओ को आधुनिक टेक्नॉलॉजी हासिल करने और खाने की गुणवत्ता औप सुरक्षा बेहतर करने में मदद मिलेगी। 

 
इस रकम के साथ एनजीओ अगले पांच वर्षों में 10 राज्यों में 50 लाख बच्चों को सुविधा देने का लक्ष्य बनाएगा, वर्तमान में संस्था 15 लाख बच्चों को खाना मुहैया कराती है। इंफोसिस से मिलने वाली रकम से जोधपुर और हैदराबाद में मॉडर्न किचेन बनाए जाएंगे। जोधपुर वाले किचेन में रोज 50,000 बच्चों के लिए और हैदराबाद के किचेन में 1 लाख बच्चों के लिए खाना बनाने की क्षमता होगी। आईटी कंपनी जोधपुर, हैदराबाद और मैसूर में किचेन की ऑपरेशन कॉस्ट भी देगी। साथ ही, वह राजस्थान में लगभग 1.5 लाख बच्चों को दिए जाने वाले भोजन और बोतलबंद पेयजल का खर्च उठाएगी। 

 

टाटा ग्रुप देशभर में 22 किचेन के लिए क्वॉलिफाइड फूड सेफ्टी इंस्पेक्टर्स की हायरिंग और अहमदाबाद, बेंगलुरु, भुवनेश्वर और लखनऊ में चार मॉडर्न फूड लैब्स का खर्च उठाएगी। इनमें से हर लैब पर करीब 50 लाख रुपये का खर्च आएगा। इन प्रयोगशालाओं में केमिकल ऐनालिसिस और दूसरे टेस्ट होंगे ताकि खाने की क्वॉलिटी बेहतर की जा सके। 

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