सहारनपुर में फिर दोराहे पर मिड-डे-मील, बिना निविदा निकाले हीं पुराने एनजीओ को दी जाएगी जिम्मेदारी !

सहारनपुर : स्कूल खुलने में कुछ दिन बाकी हैं लेकिन अभी तक तय नहीं हो पाया है कि इस सत्र में बच्चों को मिड-डे मील देने की जिम्मेदारी किसकी होगी। एक जुलाई से स्कूलों में बच्चों को मिड-डे-मील कैसे मिलेगा? इसके लिए विभाग ने अभी तक कोई कार्ययोजना नही बनाई है। सूत्र बताते हैं कि पिछले दो सालों से व्यवस्था संभाल रहे एनजीओ का ही कार्यकाल बढ़ाया जा सकता है।

परिषदीय प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, अशासकीय सहायता प्राप्त व माध्यमिक स्कूलों के दो लाख से अधिक बच्चों को मिड-डे-मील के अंतर्गत पका पकाया भोजन उपलब्ध कराया जाता है। जिले में नौ एनजीओ के स्कूलों के करीब 50 हजार बच्चों को भोजन उपलब्ध कराते हैं। विभाग के मुताबिक प्रतिमाह योजना पर 1.50 करोड़ का खर्च आ रहा है। इसमें खाद्यान्न लागत व रसोईयों का मानदेय शामिल नही है।

नही शुरू हुई प्रक्रिया
एक जुलाई से शुरू होने वाले सत्र के लिए बेसिक शिक्षा विभाग ने एनजीओ के माध्यम से दिए जाने मिड-डे-मील के लिए प्रक्रिया शुरू नही की है। बताते चले कि गत दो वर्षो से विभाग पूर्व में कार्यरत एनजीओ को ही मिड-डे-मील की जिम्मेदारी देता रहा है। सूत्र बता रहे हैं कि गुपचुप तरीके से पुराने एनजीओ को जिम्मेदारी की तैयारी चल रही है। बताते चलें कि विभाग को अप्रैल के निरीक्षण में छह स्कूलों में खाना न बनने तीन में मेन्यू के अनुसार भोजन तथा 29 स्कूलों में एगमार्क मसाले का उपयोग न होना मिला था जिस पर विभाग ने 38 शिक्षकों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की थी।

ये एनजीओ संभाल रहे हैं मिड-डे मील की जिम्मेदारी

  • हिमालयन,
  • पारस एग्रो,
  • सूरज फाउंडेशन,
  • रश्मि खादी ग्रामोद्योग,
  • श्री बालाजी समाज विकास समिति,
  • फ्रैंड्स सोसाइटी फार हयूमैन वेलफेयर,
  • वर्षा जनकल्याण शिक्षा विकास सोसाइटी,
  • घनश्याम सेवा समिति।

बीएसए विनय कुमार का कहना है कि एनजीओ संबंधी पत्रावली पर अनुमोदन के लिए कार्यवाही शुरू की जा रही है।


सभार- दैनिक जागरण ‎

सहारनपुर में क्या बिना निविदा निकाले हीं पुराने एनजीओ को दी जाएगी जिम्मेदारी, फिर दोराहे पर रहेगा मिड-डे-मील !

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