बच्चों के निवाले निगल रहे हैं एनजीओ, आंगनबाड़ी केंद्रों में अनियमितताओं और घपलेबाजी पर दिल्ली सरकार को नोटिस

दिल्ली। राजधानी के आंगनबाड़ी केंद्रों में मिड-डे मील की सप्लाई को लेकर बरती जा रही अनियमितताओं और घपलेबाजी को लेकर मीडिया में प्रकाशित खबरों को गंभीरता से लेते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने मामले में कड़ा संज्ञान लिया है। आयोग ने मीडिया रिपो‌र्ट्स पर गंभीरता दिखाते हुए अपने विशेषज्ञों के दल द्वारा कराई गई आकस्मिक जांच में आरोपों को सही पाया है। आयोग ने मामले में दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। आयोग ने मुख्य सचिव को मामले में चार सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट उनके समक्ष पेश करने के लिए कहा है।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के जनसंपर्क अधिकारी ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि बीते दिनों दिल्ली के आंगनबाड़ी केंद्रों में मिड-डे मील के वितरण को लेकर अलग-अलग अखबारों में कई खबरें प्रकाशित हुई थी। मीडिया में प्रकाशित खबरों के अनुसार दिल्ली में आठ लाख बच्चे आंगनबाड़ी केंद्रों के रजिस्टर में दर्ज बताए जाते हैं। उन्हें कागजों में मिड-डे मील भी वितरित किया जा रहा है। जबकि हकीकत यह है कि दिल्ली के 11 हजार आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चे जाते ही नहीं हैं। इससे करोड़ों रुपये का घोटाला किया जा रहा है।

बच्चों में बंटे बिना ही हर माह मिड-डे मील की खपत दिखाई जा रही है। इस तरह की बातें सामने आने पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के एक विशेषज्ञ दल ने जामा मस्जिद और लाल दरवाजा क्षेत्र के आंगनबाड़ी केंद्रों का औचक निरीक्षण किया। इसमें पाया गया कि बच्चे वहां नहीं थे, मगर उनका मिड-डे मील वितरित किया गया था। आयोग के दल ने दिनभर इन केंद्रों की निगरानी भी की थी। इसमें पाया गया था कि इन आंगनबाड़ी केंद्रों में कोई भी बच्चा नहीं गया था। दल की रिपोर्ट पर आयोग ने दिल्ली सरकार से जवाब मांगा है।

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